मेरे 12 दोस्त नदी में समाए, मैंने भी मौत देखी:विष्णु बोले- एक-दूसरे को चेन बनाकर बचाने में सभी डूबे, आगरा में 6 शव मिले

हम 6 लोग ऊटंगन नदी के किनारे थे। मेरे दोस्त भगवती और हरेश समेत 7 लोग नहा रहे थे। उनके कमर तक पानी था। वह दो कदम आगे बढ़े तो एक दम से गहरे पानी में चले गए। हरेश चिल्लाया। हम पांचों लोग चेन बनाकर वहां पहुंचे। नदी में डूब रहे भगवती और हरेश का मैंने हाथ थाम लिया। हाथ पकड़कर उन्हें खींचने लगा। मैं दो कदम आगे और बढ़ा, तभी मैं भी गहरे गड्‌ढे में चला गया। इसी बीच सबके एक-दूसरे से हाथ छूट गए। चंद सेकेंड में सभी 12 लोग पानी में समा गए। तभी मेरा हाथ पकड़कर किसी ने बाहर खींच लिया। उस दिन मैंने मौत देखी। ये कहना है 26 वर्षीय विष्णु का। विष्णु उन 12 युवकों में शामिल था, जो 2 अक्टूबर को आगरा के खेरागढ़ स्थित ऊटंगन नदी में प्रतिमा विसर्जन के दौरान नदी में डूब गए थे। वह भाग्यशाली निकला और लोगों ने उसे बचा लिया। अब तक 6 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं। 5 युवकों का चौथे दिन भी पता नहीं चल सका है। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन जारी है। गांव में चार दिन से सन्नाटा है, घरों में चूल्हे नहीं जल रहे हैं। सिर्फ रोने की आवाजें आ रही हैं। पड़ोसी गांव के लोग खाना पहुंचा रहे हैं। घटना वाले दिन क्या हुआ था? गांव का क्या माहौल है? पढ़िए रिपोर्ट… कमर तक पानी थी, 2 कदम बढ़े तो नदी में समा गए
विष्णु खेरागढ़ सीएचसी में भर्ती है। वह सदमे में है। परिजन उसे लगातार हौसला दे रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में विष्णु ने बताया कि 2 अक्टूबर की दोपहर हम सभी लोग देवी प्रतिमा विसर्जित करने के बाद नहाने के लिए नदी में चले गए। हम सभी लोग किनारे की तरफ नहा रहे थे। वहां कमर के बराबर पानी था। तभी 7 लड़के नदी में आगे बढ़ने लगे। दो कदम बढ़े ही थे कि एक-एक कर सभी डूबने लगे। इनमें मेरा पक्का दोस्त भगवती और हरेश भी था। किनारे पर खड़े हम 5 लड़के बचाने के लिए आगे बढ़े। हम लोगों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर चेन बनाकर आगे बढ़ रहे थे। मैंने भगवती के हाथ को पकड़ लिया। भगवती के हाथ को हरेश ने पकड़ा। फिर अन्य लड़कों ने भी उन्हीं दोनों का हाथ पकड़ा। मैं और अन्य लोग डूब रहे लोगों को खींचने लगे। इसी बीच मैं एक कदम आगे बढा तो मैं भी गहराई में चला गया। इसी बीच सबका हाथ छूट गया। सिर्फ भगवती का हाथ मेरे हाथ में था। मैं पानी में डूबने-उतराने लगा। इसी बीच मेरा पैर नदी के अंदर कीचड़ में धंस गया। मेरी सांसें फूलने लगी। मैं डूबने लगा था, इसी बीच किसी ने मेरा हाथ पकड़ जोर से बाहर खींचा। मुझे बाहर निकालने वाला कौन था, मुझे याद नहीं। मैं बेहोश हो चुका था। मेरी आंख जब खुली तो मैं अस्पताल में था। अब जानते हैं कैसा है गांव का हाल 4 दिन से नहीं जले चूल्हे, पड़ोसी गांव से आ रहा खाना
नदी में डूबे सभी युवक आगरा की खेरागढ़ तहसील के कुसियापुर गांव के रहने वाले हैं। ये गांव आगरा से 45 किमी दूर और राजस्थान बॉर्डर से सिर्फ 500 मीटर पहले है। 2500 आबादी वाले इस गांव में न बच्चों का शोर सुनाई दे रहा है और न ही गलियों में आवाजाही। दूर-दूर तक गांव में सन्नाटा है। गांव में सिर्फ महिलाएं हैं। गांव के सभी पुरुष ऊटंगन नदी किनारे सातों युवकों के बाहर निकाले जाने की राह में चार दिन से डेरा डाले हुए हैं। जिन परिवारों के लड़के नदी में डूब गए, उनके घरों से सिर्फ रोने की आवाजें आ रहीं। रिश्तेदार-गांव के लोग उनके घर पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं। पूरा गांव गमगीन है। तमाम घरों में चूल्हे नहीं जले हैं। पड़ोसी गांव के लोग भी दुख बांटने पहुंच रहे हैं। पड़ोसी गांव डुंगरपुर के लोग रिक्शे से खाना पहुंचा रहे हैं। गांव के युवक रिक्शे में बड़े-बड़े भगोनों में पूड़ी-सब्जी लेकर हर घर जा रहे हैं। मना करने के बावजूद वे उनके घरों में खाना रखकर आ रहे हैं। अब लड़कों के परिवारों के बारे में जानिए विमलेश की आंखें सूजी, बोलीं- कोई मेरे गजेंद्र को ला दे
गांव में बीचोबीच में गजेंद्र का घर है। गजेंद्र भी डूबने वाले युवकों में शामिल हैं। उनकी मां विमलेश घर के अंदर हैं। गांव की महिलाएं उन्हें घेरे बैठी हैं। मां को रोता देख महिलाएं भी अपने आंसू रोक नहीं पा रही थीं।4 दिन से घर में मातम है। मां की आंखें सूज गई हैं। बेटे की याद में मां चार दिनों से बिना खाए-पीए सिर्फ रो रही। आने-जाने वालों से वह एक बात कहती- मेरे लाल को वापस ला दो। उसे मेरे सामने ले आओ। मुझे उसे देखना है। कोई उसे मेरे पास ले आए। मैंने चार दिन से उसे देखा नहीं है। हर घर से रोने की आवाज आ रही
गजेंद्र के घर से चंद कदमों की दूरी पर ही सचिन का घर है। सचिन की भी तलाश चार दिनों से हो रही। वह भी उन 7 युवकों में है, जिनको नदी से नहीं निकाला जा सका है। सचिन के घर के सभी पुरुष घटनास्थल पर ही डेरा डाले हुए हैं। घर पर उसकी मां तथा अन्य रिश्तेदार हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। महिलाओं की स्थिति सबसे खराब है। दूर-दूर तक इनके रोने की आवाज ही सुनाई दे रही है। रेस्क्यू अभियान कहां तक पहुंचा, वो पढ़िए-
ऊटंगन नदी में मूर्ति विसर्जन के दिन 13 युवक नदी में डूब गए थे। 5 युवकों की तलाश अभी भी जारी है। गगन, ओमपाल, मनोज, भगवती, अभिषेक, करन के शव निकाल गए। जबकि सचिन, हरेश, विनेश, गजेंद्र, दीपक और ओकेश अब भी लापता हैं। सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ मिलकर स्थानीय लोग भी नदी में युवकों की तलाश कर रहे हैं। 250 मीटर के क्षेत्र में नदी के पानी का बहाव रोकने के लिए क्षेत्रीय युवकों ने रात-दिन की परवाह किए बिना 40 मीटर लंबा अस्थायी बांध बना दिया है। नदी की धारा को डूब क्षेत्र के बीच से नाला बनाकर दूसरी ओर मोड़ा गया है। पोकलेन और JCB से खुदाई जारी है। ……………………… ये खबर भी पढ़िए- रायबरेली में युवक की पीट-पीटकर हत्या का नया वीडियो: मरते वक्त युवक चीखकर बोला- राहुल गांधी…, भीड़ ने कहा- यहां सब बाबा वाले हैं रायबरेली में शुक्रवार को ड्रोन चोर के शक में भीड़ ने पीट-पीटकर एक युवक को मार डाला। इस पूरी घटना का एक नया वीडियो सामने आया है। जिसमें युवक मार खाते हुए राहुल गांधी का नाम लेता है। इस पर भीड़ में से एक शख्स ने कहा-यहां सब ‘बाबा’ वाले हैं। इसके बाद उसे बेरहमी से पीटते रहे। पढ़ें पूरी खबर…

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