हनुमानगढ़ जिले में धानका/धाणका समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किए जाने के विरोध में आंदोलन तेज हो गया है। इसी क्रम में सोमवार को जिले की सभी अनाज मंडियों में एक दिन के लिए कामकाज पूरी तरह बंद रहा। धानका/धाणका जनजाति संघर्ष समिति के नेतृत्व में यह विरोध दर्ज कराया गया। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि धानका समाज के लोग पीढ़ियों से कृषि उपज मंडियों में मजदूरी का कार्य करते आ रहे हैं। वे अनाज की सफाई, तुलाई और लदान जैसे कामों से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। यह समाज परंपरागत रूप से मेहनतकश वर्ग है, जो वर्षों से इसी व्यवसाय पर निर्भर है। समिति के अनुसार पहले इस समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति वर्ग में मान्यता प्राप्त थी और जाति प्रमाण-पत्र जारी किए जाते थे। समिति ने स्पष्ट किया कि धानका और धाणका एक ही उच्चारण और एक ही जाति वर्ग से संबंधित हैं, इनमें कोई भेद नहीं है। समिति ने पूर्व में मीणा और मीना समाज में हुए इसी तरह के विवाद का हवाला दिया, जिसे सरकार ने दोनों को समान मानते हुए सुलझाया था। समिति ने मांग की है कि धानका समाज के लिए भी समान निर्णय लागू किया जाना चाहिए। जिला कलेक्ट्रेट के बाहर 56वें दिन भी शांतिपूर्ण धरना जारी है। संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे समाज में आक्रोश है। समिति ने प्रशासन से जाति प्रमाण-पत्र जारी करने पर लगी मौखिक रोक को तत्काल निरस्त करने और पूर्ववत् प्रक्रिया फिर से शुरू करने की मांग की है। समाज के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही उचित निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए जिलेभर की मंडियों में चरणबद्ध तरीके से कामबंदी की जाएगी।


