चित्तौड़गढ़ के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल में सोमवार से दो दिवसीय जिला स्तरीय इंस्पायर अवार्ड्स मानक प्रदर्शनी 2024-25 की शुरुआत हुई। इस प्रदर्शनी में जिले के अलग-अलग स्कूलों से आए 210 बाल वैज्ञानिकों ने अपने नवाचार और वैज्ञानिक सोच का प्रदर्शन किया। उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सांसद सी.पी. जोशी रहे। उन्होंने बच्चों के मॉडल देखकर उनकी सराहना की। सांसद जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “आज का भारत आत्मनिर्भर बनकर विकसित देश की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हमारे बाल वैज्ञानिकों के ये प्रयोग और नवाचार देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि और वैज्ञानिक सोच से आज नई शिक्षा नीति के जरिए बच्चों को ऐसा अवसर मिला है, जो ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक सोच को प्रोत्साहित करता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर परिषद के पूर्व सभापति सुशील शर्मा ने की, जबकि आयोजन संरक्षक एवं मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. महावीर कुमार शर्मा ने बताया कि चित्तौड़गढ़ जिले का नाम आज राज्यभर में रोशन हो रहा है। जिले ने राजस्थान में छठा और उदयपुर संभाग में पहला स्थान प्राप्त किया है, जो यहां के विद्यार्थियों की सृजनशीलता और नवाचारी सोच का बड़ा उदाहरण है। समापन समारोह मंगलवार, 7 अक्टूबर को दोपहर 1.15 बजे होगा, जिसमें विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और जिला कलेक्टर आलोक रंजन मुख्य अतिथि रहेंगे। प्रदर्शनी रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक स्टूडेंट्स और आमजन के लिए खुली रहेगी। किसान के बेटे ने बनाई अनाज उठाने की मशीन सुरखंड सरकारी स्कूल के 9वीं कक्षा के 14 साल के छात्र रामेश्वर लाल जाट ने अपने पिता की मेहनत को देखकर एक अनोखी अनाज उठाने की मशीन बनाई है। रामेश्वर ने बताया कि उसके पिताजी माधव लाल जाट मजदूरी करते हैं और अक्सर भारी अनाज की बोरियां उठाने में मुश्किल का सामना करते हैं। यह देखकर उसने सोचा कि अगर कोई ऐसी मशीन बने जो अनाज को उठाकर पहले बोरी में डाले और फिर बोरी को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सके तो मजदूरों को बहुत राहत मिलेगी। रामेश्वर की बनाई मशीन खेतों या गोदामों में रखे अनाज को आसानी से उठाकर दूसरी जगह पहुंचा सकती है। उसका कहना है कि “अगर यह मशीन बड़े पैमाने पर बनाई जाए, तो किसी भी मजदूर को अब खेत में रखे अनाज और भारी बोरी उठाने में परेशानी नहीं होगी।” ब्लाइंड लोगों के लिए हंसा कुमावत का अभिनव “सुरक्षा कैप” पंचदेवला सरकारी स्कूल की 10वीं कक्षा की 16 साल की छात्रा हंसा कुमावत ने दृष्टिहीन लोगों के लिए एक स्मार्ट कैप तैयार की है। हंसा ने बताया कि उसने कई बार ऐसे ब्लाइंड लोगों को देखा है जो सड़क पार करते समय गाड़ियों या लोगों से टकरा जाते हैं। इस परेशानी को देखकर उसे यह आइडिया आया। उसकी बनाई कैप में एक छोटा सायरन सेंसर लगा हुआ है, जो सामने किसी व्यक्ति, वाहन या अवरोध के आने पर बीप की आवाज देने लगता है। इससे दृष्टिहीन व्यक्ति को खतरे का आभास पहले ही हो जाता है और वह सुरक्षित रह सकता है। हंसा का कहना है कि यह कैप भविष्य में दिव्यांगजनों के लिए बहुत मददगार साबित हो सकती है। जंगली जानवरों से सुरक्षा देगा मोहित सिंह का सिस्टम कदमाली सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के 17 वर्षीय छात्र मोहित सिंह ने वाइल्डलाइफ मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया है। मोहित ने बताया कि जंगलों के आसपास बसे गांवों में कई बार जंगली जानवर घरों में घुस आते हैं, जिससे लोगों को डर और नुकसान का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए उसने ऐसा सिस्टम बनाया है, जिसमें किसी भी जानवर के गेट से प्रवेश करते ही अलर्ट सिग्नल घर के अंदर बैठे व्यक्ति तक पहुंच जाता है। यह सिस्टम मालिक को तुरंत अवेयर कर देता है और साथ ही सेंसर की आवाज से जानवर भी अंदर आने से रुक जाते हैं। मोहित का यह प्रोजेक्ट ग्रामीण इलाकों और फार्महाउसों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। मजदूरों की मदद को प्रिंस तेली की ईंट उठाने की मशीन रानीखेड़ा सरकारी स्कूल के 9वीं कक्षा के 15 वर्षीय छात्र प्रिंस तेली ने ऐसी ईंट उठाने की मशीन बनाई है जो एक साथ छह ईंटों को आराम से उठा सकती है। प्रिंस ने बताया कि उसने कई बार मजदूरों को एक-एक ईंट उठाते हुए देखा है, जिससे उन्हें बहुत समय और मेहनत लगती है। यही देखकर उसने यह मशीन तैयार की। उसकी बनाई मशीन से मजदूर बिना ज्यादा जोर लगाए एक साथ कई ईंटें उठा सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि शारीरिक थकान भी कम होगी। प्रिंस का कहना है कि “अगर यह मशीन हर निर्माण स्थल पर लग जाए, तो मजदूरों की जिंदगी काफी आसान हो जाएगी।” नवाचारों से भरी रही प्रदर्शनी दो दिवसीय इस प्रदर्शनी में बच्चों ने विज्ञान के कई क्षेत्रों जैसे पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि, सुरक्षा और ऊर्जा पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किए। हर बाल वैज्ञानिक ने अपनी सोच और मेहनत से यह दिखाया कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे जीवन का अहम हिस्सा है।


