जेकेके के 28वें लोकरंग में जुटेंगे देशभर के लोक कलाकार:सात अक्टूबर से होगी शुरुआत, 11 दिवसीय उत्सव में होंगी नृत्य की विभिन्न विधाएं

जवाहर कला केन्द्र में 28वें लोकरंग को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गयी है। 7 से 17 अक्टूबर तक लोक संस्कृति के रंग में रंगने वाले इस 11 दिवसीय महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव के अंतर्गत राष्ट्रीय लोक नृत्य समारोह और राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला आयोजित होगा। 28वें लोकरंग में विभिन्न राज्यों के ढाई हजार से अधिक कलाकार अपने क्षेत्र की लोक कलाओं को प्रस्तुत करेंगे। कला, साहित्य, संस्कृति, पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग के प्रमुख शासन सचिव राजेश यादव ने सोमवार को लोकरंग के पोस्टर का विमोचन किया। इस दौरान जवाहर कला केंद्र की अतिरिक्त महानिदेशक प्रियंका राठौड़ भी मौजूद रहीं। महोत्सव का भव्य उद्घाटन 7 अक्टूबर को सायं 6:30 बजे शिल्पग्राम, जेकेके में होगा। मुख्य अतिथि कला, साहित्य, संस्कृति, पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग के प्रमुख शासन सचिव राजेश यादव और विशिष्ट अतिथि रूडा के चेयरमैन हेमंत कुमार गेरा शिल्पग्राम में लोकरंग की ध्वजा फहराकर कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। मनोरंजन का त्रिवेणी संगम राष्ट्रीय लोक नृत्य समारोह के तहत अब त्रिस्तरीय मनोरंजन कला प्रेमियों को मिलेगा। राजस्थान की लोक कलाओं के साथ ही पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों के कलाकार अपनी लोक कलाओं की प्रस्तुति देंगे। शिल्पग्राम के मुख्य मंच पर सायं 5 से 6:30 बजे तक लोक कलाओं की प्रस्तुति होंगी। इसके बाद सायं 7 बजे से मध्यवर्ती में लोक नृत्य, गायन और वादन की महफिल सजेगी। रात्रि 8:30 से रात्रि 10 बजे तक रात्री लोक जागरण का आयोजन शिल्पग्राम के मुख्य मंच पर होगा। हस्तशिल्प मेले में आगंतुक सौम्य लय के मधुर गीतों का आनंद ले सकेंगे। मेले में अवॉर्डी दस्तकारों के उत्पादों की प्रदर्शनी शिल्पग्राम में प्रात: 11 बजे से रात्रि 10 बजे तक राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीण गैर कृषि विकास अभिकरण (रूडा) के सहयोग से मेले में हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट्स की स्टॉल्स लगेंगी। इनमें अवॉर्डी दस्तकारों के उत्पाद शोकेस होंगे। इसी के साथ विभिन्न राज्यों के प्रसिद्ध व्यंजनों की स्टॉल्स भी यहां लगेंगी। विजिटर्स हस्तशिल्प उत्पाद खरीदने के साथ लजीज व्यंजनों का लुत्फ भी उठा सकेंगे। इतना ही शहनाई-नगाड़ा, बहुरूपिया, नट, कठपुतली कला की प्रस्तुतियों से मेला दिनभर आबाद रहेगा।

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