कांग्रेस के पूर्व मंत्री भरत सिंह कुंदनपुर का निधन:वार्ड पंच से लेकर विधायक, मंत्री तक का किया सफर, ईमानदार छवि से पूरे देश में जाने जाते,बीजेपी सरकार ने सर्वश्रेष्ठ विधायक से सम्मानित किया

राजस्थान की राजनीति में ईमानदारी और जनसेवा की मिसाल रहे पूर्व मंत्री भरत सिंह कुंदनपुर का सोमवार देर रात जयपुर के एसएमएस अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। पहले कोटा मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जयपुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। 15 अगस्त 1950 को जन्मे भरत सिंह का जीवन समर्पण, संघर्ष और सेवा की कहानी रहा। उन्होंने राजनीति की शुरुआत सरपंच पद से की और विधायक, सांसद, प्रधान, और मंत्री जैसे जिम्मेदार पदों तक पहुंचे। ईमानदारी और स्पष्टवादिता उनकी पहचान थी। बतौर ग्रामीण विकास, पंचायतीराज और सार्वजनिक निर्माण मंत्री रहते हुए उन्होंने राजनीति में शुचिता और पारदर्शिता लाने की मिसाल कायम की। 2007 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 2018-23 के कार्यकाल में विधायक रहते हुए उन्होंने अगला चुनाव न लड़ने की घोषणा कर राजनीति में एक नई परंपरा स्थापित की। भरत सिंह ने हमेशा भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई, चाहे पार्टी में हों या सरकार में। उनका निधन हाड़ौती और राजस्थान की राजनीति के लिए गहरा धक्का है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा की हाड़ौती की धरती ने आज एक सच्चा जनसेवक खो दिया एक ऐसा नेता जो पद से नहीं, अपने कर्मों से जनता के दिलों में जिंदा रहेगा। भरत सिंह अपने पीछे एक सादगीभरा जीवन, पारदर्शी राजनीति और जनसेवा की अद्वितीय विरासत छोड़ गए हैं। कल कोटा ग्रामीण क्षेत्र के कुंदनपुर गांव में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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