पापा घर ले चलो…ये वो शब्द थे, जो 2 साल की योगिता ने अपनी अंतिम सांस तक कहे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। दो दिन में ही किडनी फेल होने से योगिता की जान चली गई जबकि परिवार ने इलाज में 13 लाख रुपए खर्च कर दिए थे। सरकार ने उसके परिवार को 4 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया है। योगिता के पिता सुशांत ठाकरे का कहना है कि इससे उनकी बेटी वापस नहीं आ सकती। ऐसा ही दर्द बैतूल के किसान कैलाश भी झेल रहे हैं। अपने बेटे की जान बचाने के लिए उन्होंने 3 एकड़ जमीन 4.5 लाख रुपए में गिरवी रख दी। इलाज पर 5 लाख रुपए खर्च कर दिए लेकिन बेटे को बचा नहीं सके। अब वे गलत इलाज करने वाले डॉक्टर और दवा कंपनी पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। नागपुर के अस्पतालों में अभी भी कई बच्चों का इलाज चल रहा है। भास्कर टीम ने जहरीले कफ सिरप की वजह से छिंदवाड़ा और बैतूल में बच्चों को खोने वाले ऐसे ही परिवारों का दर्द जाना। पढ़िए, रिपोर्ट… पहले देखिए दो तस्वीरें डॉक्टर गिरफ्तार-निलंबित, कंपनी के खिलाफ FIR
छिंदवाड़ा जिले के परासिया में 14 बच्चों की मौत के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डॉ. प्रवीण सोनी और श्रेसन फार्मास्युटिकल कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। डॉ. सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर हुई इस कार्रवाई में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। जांच में कफ सिरप कोल्ड्रिफ में 46.2% डायएथिलिन ग्लायकॉल (DEG) की पुष्टि हुई है, जिसे बच्चों की मौत का कारण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर डॉ. सोनी को निलंबित कर दिया गया है। बैतूल में भी कोल्ड्रिफ की वजह से दो बच्चों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। परिजन का कहना है कि उन्होंने भी डॉ. सोनी से इलाज कराया था, जिसके बाद बच्चों की हालत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। एक बच्चे को नागपुर और फिर भोपाल ले जाया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पुलिस मामले की जांच कर रही है। योगिता का छिंदवाड़ा से नागपुर तक इलाज
छिंदवाड़ा निवासी योगिता के पिता सुशांत ठाकरे ने बताया कि वे हमेशा डॉक्टर ठाकुर से अपनी बेटी का इलाज कराते थे। लेकिन इस बार जब 8 सितंबर को बुखार आया तो शाम के 5 बजे डॉ. ठाकुर के नहीं मिलने पर डॉ. प्रवीण सोनी के पास पहुंच गए। दवाई लेने के बाद वे बेटी को लेकर घर आ गए। चार टाइम दी जाने वाली दवाई से अगले दिन 9 सितंबर को बुखार तो कम हुआ, लेकिन बिटिया ने हरे रंग की उल्टियां कीं। वे दोबारा डॉ. प्रवीण सोनी के पास पहुंचे। डॉक्टर ने जांच के बाद सुशांत को बोल दिया कि बेटी को लेकर नागपुर चले जाओ क्योंकि उसकी किडनी में इन्फेक्शन हो गया है, जिसका इलाज छिंदवाड़ा में नहीं हो पाएगा। सुशांत बेटी को लेकर तत्काल नागपुर के लिए निकल गए। जिस आस्था अस्पताल का पता डॉक्टर प्रवीण सोनी ने बताया था, वहां पहुंचने पर पता चला कि योगिता को डायलिसिस की जरूरत है। यह सुविधा उनके पास नहीं है, इसके चलते रात को 2:00 बजे नेल्सन हॉस्पिटल में योगिता को भर्ती किया गया। जहां 22 दिन तक उसका इलाज चला। इस दौरान 16 डायलिसिस हुए। 13 लाख रुपए खर्च किए, मदद भी नहीं मिली
नागपुर के नेल्सन हॉस्पिटल का बिल 12 लाख रुपए से अधिक हो गया तो सुशांत ने छिंदवाड़ा कलेक्टर से मदद की गुहार लगाई। कलेक्टर ने सीएमएचओ को मामले में दखल देने को कहा। अगले ही दिन सीएमएचओ ने सुशांत को फोन कर डांटा। कहा कि जब आर्थिक स्थिति खराब होती है, तभी आप लोगों को शासकीय अस्पताल की याद आती है। इसके बाद उन्होंने बिटिया को नागपुर मेडिकल हॉस्पिटल ले जाने की बात कही। सुशांत बिटिया को लेकर वहां पहुंचे, लेकिन एक दिन भर्ती रहने पर भी कोई विशेष इलाज न होता देख योगिता को वे लता मंगेशकर अस्पताल ले गए। जहां वह एक अक्टूबर से 4 अक्टूबर तक भर्ती रही। इस दौरान इस अस्पताल का बिल 1 लाख रुपए बन गया। 4 अक्टूबर को योगिता मौत से जंग हारी
4 अक्टूबर की दोपहर 1 बजे योगिता ने दम तोड़ दिया। सुशांत और शिवानी ने अपनी पहली संतान को 2 साल की उम्र में ही खो दिया। उसके इलाज में सुशांत आर्थिक रूप से भी टूट चुके हैं। प्राइवेट स्कूल में शिक्षक के पद पर पदस्थ सुशांत ठाकरे की मदद के लिए बड़े भाई ने FD तोड़ी। दोनों बहनों ने भरपूर मदद की। उनके दोस्त भी आगे आए। मुंबई के एकम फाउंडेशन ने भी एक लाख रुपए की मदद की, लेकिन वे योगिता को बचा नहीं पाए। 22 दिन तक नाली के पास सोए, भूखे पेट रहे
सुशांत ने बताया कि पत्नी शिवानी, पिता और कुछ रिश्तेदारों के साथ नेल्सन हॉस्पिटल के बेसमेंट में 22 दिन गुजारे। बेसमेंट में गंदा पानी निकालने के लिए बनी नाली के किनारे परिवार के साथ रात गुजारते थे। योगिता के परिवार के सदस्य आ जाओ, की आवाज सुनते ही वार्ड की तरफ भागते थे। खाने का ठिकाना नहीं रहता था, कभी कुछ पैक करा कर ले आए तो सभी बैठकर नीचे खा लिया, नहीं तो भूखे पेट ही दिन गुजर रहे थे। उम्मीद यही थी कि बेटी जल्दी ठीक हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री द्वारा 4 लाख दिए जाने की घोषणा करने पर सुशांत कहते हैं कि सरकार यह राशि अपना पल्ला झाड़ने के लिए दे रही है। बच्चों के इलाज में 12 से 15 लाख रुपए खर्च हुए हैं। पोस्टमॉर्टम को लेकर एसडीएम के गोलमोल जवाब
परासिया एसडीएम शुभम कुमार यादव का एक वीडियो सामने आया। इसमें मीडियाकर्मी उनसे मृत बच्चों के पोस्टमॉर्टम के बारे में सवाल कर रहा है। पोस्टमॉर्टम क्यों नहीं कराया, इस सवाल पर एसडीएम यादव ने कहा- बच्चों से लगाव के चलते पेरेंट्स पोस्टमॉर्टम के लिए तैयार नहीं थे। इस पर मीडियाकर्मी ने कहा- एक बच्चे के परिजन ने ऐसे आरोप लगाए हैं कि वे पोस्टमॉर्टम के लिए तैयार थे। प्रशासन ने इस बारे में कुछ कहा ही नहीं। इस पर एसडीएम ने कहा- सभी बच्चों की मौत नागपुर में ही हुई है। ऐसे में पोस्टमॉर्टम करवाने के लिए पेरेंट्स का तैयार होना जरूरी था। इसके बाद वे गोलमोल जवाब देने लगे। अब तक जिले में कुल 14 बच्चों की मौत हो चुकी
छिंदवाड़ा एडीएम धीरेंद्र सिंह ने बताया कि अब तक जिले में कुल 14 बच्चों की मौत हो चुकी है। परासिया में 11, छिंदवाड़ा में 2 और चौरई में 1 बच्चे की जान गई है। परिजन को प्रदेश सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी स्वीकृत की गई है। अभी नागपुर में 8 बच्चे भर्ती हैं। एडीएम सिंह ने कहा- आज जो पोस्टमॉर्टम हुआ है, मृत बच्ची योगिता ठाकरे के परिजन के कहने पर किया गया है। परिजन ने उसे बड़कुई में दफन कर दिया था। पिता बोले- डॉ. ने रुपए लिए, पर बच्चे को मौत दे दी बैतूल के कलमेश्वरा गांव के रहने वाले कबीर के पिता कैलाश यादव बार-बार अपने मोबाइल पर बेटे की फोटो देखकर उसे याद करते हैं। उन्होंने जहरीले कफ सिरप की शीशी भी संभालकर रखी है। वे कहते हैं- एक हफ्ते के इलाज में 5 लाख का खर्च आया था। इसके लिए मैंने अपनी तीन एकड़ जमीन गिरवी रख दी थी। डॉ. सोनी ने भी 20 हजार रुपए लिए, पर बच्चे को मौत दे दी। कोल्ड्रिफ और डॉक्टर की वजह से बच्चा भी गया, जमीन भी गई। सर्दी-जुकाम के इलाज से बिगड़ी तबीयत
दरअसल, कबीर को 24 अगस्त को सर्दी-जुकाम हुआ था। कैलाश उसे परासिया के डॉ. प्रवीण सोनी के पास ले गए। डॉक्टर ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप समेत तीन दवाएं लिखीं। सिरप को दिन में चार बार तीन-तीन एमएल देने के लिए कहा गया था। चार दिन तक यह दवा देने के बाद 29 अगस्त को बच्चे की तबीयत और बिगड़ गई। पेशाब बंद हो गई। उसे खून की उल्टियां होने लगीं। बेटे की हालत बिगड़ती देख कैलाश ने इलाज के लिए पैसों का इंतजाम करना शुरू किया। 30 अगस्त को उन्होंने गांव के ही सीताराम पटेल के पास अपनी तीन एकड़ जमीन साढ़े चार लाख रुपए में गिरवी रख दी। सीताराम ने उनसे कहा था- पैसे लौटाओ तो जमीन वापस मिलेगी। कैलाश बताते हैं- डॉक्टर ने कहा था दिन में चार बार कोल्ड्रिफ सिरप दो। जैसे-जैसे सिरप देते गए, हालत और बिगड़ती गई। पेशाब बंद हो गया, खून आने लगा। जब मैंने पूछा तो डॉक्टर नाराज हो गया। वे कहते हैं कि अब जांच होनी चाहिए। मेरे बच्चे को सिरप ने मारा या इलाज में लापरवाही हुई। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… दवा कंपनी पर FIR, डॉक्टर गिरफ्तार-निलंबित…तो सिस्टम बेदाग क्यों? मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया में 14 बच्चों की मौत की पुष्टि के बाद आखिरकार प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार रात जिले के परासिया थाना में डॉ. प्रवीण सोनी और श्रेसन फार्मास्युटिकल कंपनी (कांचीपुरम, तमिलनाडु) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पढ़ें पूरी खबर…


