मौसम विभाग:मानसून से पहले 2 करोड़ से नाले साफ हुए थे फिर भी 8 एमएम बारिश में मोहल्ले, सड़कें और गलियां जलमग्न

मानसून से पहले नगर निगम ने 2 करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च कर ठेके पर नाला सफाई कराई। कुछ नाले खुद निगम काे साफ करने थे मगर मानसून बीतने के 15 दिन बाद सोमवार काे हुई सिर्फ 8 एमएम बारिश ने नाला सफाई की हकीकत बयां कर दी। शहर की सड़काें काे देखकर लग रहा मानो 80 एमएम बारिश हुई। खुद निगम के सामने की रोड और पीछे का नाला दोनों ओवरफ्लो हो रहे हैं। दरअसल बीती आधी रात के बाद शहर की फिजां बदली। अलसुबह बारिश हुई। सुबह साढ़े आठ बजे तक सिर्फ 8 एमएम बारिश हुई लेकिन लोग जब शहर से गुजरे तो लगा 8 नहीं, 80 एमएम बारिश हुई। नगर निगम के सामने परंपरागत रूप से सड़क जलमग्न हो गई। खुद निगम के कार्मिकों को आफिस आने में दिक्कत हुई। ढोलामारू के सामने से गुजरे तो भी सड़क दरिया सी बनी थी। गजनेर रोड भी पानी से ओवरफ्लो थी। अंबेडकर सर्किल के पास नाला जाम होने से सीवरेज ओवरफ्लो है तो वहां से पब्लिक पार्क आते समय मारवाड़ हॉस्पिटल के पास सीवरेज उफान मारकर पानी ने पास की 20 मीटर तक सड़क तोड़ दी। सूरसागर के पास सड़क ही लबालब है। सुबह 10 बजे भी लोग आफिस गए तो रास्ता बदलना पड़ा क्योंकि सड़क पर पानी था। ये सब तब हालात हैं जब नगर निगम ने नाला सफाई के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए मगर हैरानी ठेके पर भी वही सफाई हुई जैसे निगम करता था। कोई नाला पूरी तरह पटि्टयां हटाकर साफ नहीं किया गया। सिर्फ 100-50 मीटर की दूरी पर जगह से पट्‌टी हटाकर कचरा निकाल दिया। कोई मैकेनिज्म न बनाकर अगर ऐसे नाले साफ होंगे तो हर साल शहर यूं ही डूबेगा। पटेलनगर पुलिया में रिसाव पटेल नगर पुलिया में बीती रात आई बारिश के बाद पानी का रिसाव शुरू हाे गया। कुछ साल पहले ही यूआईटी ने इसकी मरम्मत ताे कराई थी मगर अब उसकी हालत इतनी जर्जर है कि पुलिया एक तरफ झुक गई। प्रशासन ने अगर ध्यान नहीं दिया ताे कभी भी गिर सकती है। अगर गिरी काे दुघर्टना हाेने की आशंका है। ओवरफ्लो सीवरेज कोढ़ में खाज सीवरेज में लोग बोरे, पुराने रजाई गद्दे समेत दुनिया भर प्लास्टिक कचरा डाल रहे हैं। कुचिलपुरा के पास जब कुछ दिन पहले सफाई हुई तो ये सारी सामग्री सामने आई। ये हालात पूरे शहर में हैं। सीवरेज हर जगह जाम है। जाम सीवरेज का ही नतीजा है कि चारों ओर ओवरफ्लो हो रही है। सड़कें इसी वजह से टूट रही हैं। शहर को धोखा दे रहे अफसर, नेताओं ने साधी चुप्पी दो करोड़ से ठेके पर नाला सफाई के नाम पर भी फार्मेलिटी की गई। स्वच्छता पर लगातार बजट खर्च किए जा रहे हैं मगर ऐसा लगता है कि अधिकारियों को शहर और यहां की सुविधाओं से कुछ भी लेना देना नहीं। सिर्फ शहर को धोखा दिया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों ने भी चुप्पी साध रखी है।

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