श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति में कालजयी पुण्य स्मरण श्रृंखला का 93वां पुष्प पाण्डेय बेचन शर्मा ’उग्र’ को समर्पित किया गया। सामाजिक विषमताओं पर बेबाक ढंग से लिखने और स्वतंत्रता प्रेमी होने से अंग्रेजों के खिलाफ लेखन में आवाज की उग्रता के कारण पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र साहित्यकार के रूप में जाने जाते थे। उनका जीवन परिचय देते हुए प्रचार मंत्री हरेराम वाजपेयी ने बताया कि उग्रजी कवि, कथाकार, नाटककार, उपन्यासकार और श्रेष्ठ प्रतिभा सम्पन्न पत्रकार थे। इनके समकक्ष मित्रों में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, जयशंकर प्रसाद, शिव पूजन सहाय, विनोद शंकर व्यास और प्रेमचंद आदि थे। ’प्रिय प्रवास’ की शैली में अपनी किशोरावस्था में ही इन्होंने ’ध्रुव चरित’ नामक प्रबंध काव्य की रचना कर मौलिक प्रतिभावान साहित्यकार के रूप में प्रसिद्धि पाई थी। इन्होंने अनेक पत्र-पत्रिकाओं का जिसमें – आज, मतवाला, संग्राम, हिन्दी पंच के सम्पादन के साथ श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति से प्रकाशित होने वाली ’वीणा’ पत्रिका के सह-सम्पादक के रूप में भी कार्य किया। उनके संबंध में डाॅ. दीप्ति गुप्ता ने कहा कि साहित्यकार की पहचान उसके लेखन से होती है उग्रजी उसी श्रेणी के साहित्यकार रहे। उन्होंने उनकी कहानी ’मूर्खा’ का वाचन भी किया। मोहन रावल ने उनकी लिखित ’उसकी मां कहानी पर विचार व्यक्त किए और बताया अंग्रेजों ने उनकी कई कहानियां और साहित्य को जब्त भी किया था। अरविन्द जोशी ने उनके कई अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला। प्रेमचंद से तुलना, साहित्य के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ उठाने के कारण जेल यात्रा, बेचन नाम क्यों पड़ा आदि बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। वाणी जोशी ने उनके लेखन पर बातें कीं। निलेश प्रजापति ने उन्हें सामाजिक विसंगतियों के खिलाफ लिखने वाला साहित्यकार बताया। लक्ष्मीनारायण ’उग्र’ ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्ही.डी. ज्ञानी ने उनकी कविता ’रुपया बोलता है’ के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में उग्र द्वारा किए गए प्रहारों पर चर्चा की। ’वीणा’ पत्रिका को उनके द्वारा दिए गए सहयोग को याद किया और कहा कि आज मैं इस कार्यकम में आकर आनंद का अनुभव कर रहा हूं। इस अवसर पर नयन राठी, प्रबंध मंत्री घनश्याम यादव, पुस्तकालय मंत्री अरविन्द ओझा, श्याम सिंह, अमर सिंह मानावत, नागेश जोशी, सुरेश प्रजापति, प्रकाश जैन, हिमेश राणा आदि उपस्थित थे। 29 दिसंबर 1900 को जन्मे एवं 23 मार्च 1967 को इस संसार से विदा लेने वाले साहित्यकार के चित्र का अनावरण भी किया गया। आभार परीक्षा मंत्री उमेश पारीख ने व्यक्त किया।


