रिम्स अस्पताल का हाल बेहाल:890 फायर एक्सटिंग्विशर में से 563 ​किसी काम के नहीं, 327 ही दुरुस्त

जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में रविवार की रात शॉर्ट सर्किट से लगी आग में 8 लोगों की मौत हो गई थी। अस्पतालों में होने वाली यह पहली घटना नहीं है। इसके बावजूद बड़े से बड़े अस्पताल व चिकित्सा संस्थान इस पर ध्यान नही देते हैं। झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रांची स्थित रिम्स का भी यही हाल है। यहां लगे 65% से ज्यादा फायर सिस्टम फेल हो चुके हैं। ज्यादातर फायर एक्सटिंग्विशर की रिफिलिंग दो-तीन सालों से भी नहीं हुई है। रिम्स में लगे एबीसी टाइप के कुल 866 फायर एक्सटिंग्विशर में केवल 327 ही दुरुस्त हैं, जबकि 539 फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायर हो चुके हैं। ये एक्सपायर्ड अग्निशमन यंत्र रिम्स की पुरानी बिल्डिंग के लगभग हर वार्डों में हैं। इनमें पीडियाट्रिक वार्ड से लेकर मेडिसिन, सर्जरी, न्यूरो, आई समेत अन्य विभाग शामिल हैं। यदि पुरानी बिल्डिंग में गलती से भी आग लग गई तो काबू पाना मुश्किल हो जाएगा। एजेंसी को नोटिस दिया गया है, नए फायर सिस्टम के लिए भी टेंडर अपलोड हो चुका है एजेंसी को सिलिंडर रिफिलिंग का काम दिया गया था, लेकिन कुछ रिफिलिंग के बाद एजेंसी ने काम बंद कर दिया। इसके बाद प्रबंधन की ओर से एजेंसी को लीगल नोटिस दिया गया है। एजेंसी ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही काम पूरा करेगी। यदि एजेंसी काम पूरा नहीं करती है तो नई एजेंसी का चयन कर काम कराया जाएगा। पुरानी एजेंसी पर कार्रवाई भी होगी। वहीं, अस्पताल परिसर में कई स्थानों पर नए फायर सिस्टम भी लगने हैं, इसका भी टेंडर अपलोड किया जा चुका है। – डॉ. शैलेश त्रिपाठी, अपर चिकित्सा अधीक्षक, रिम्स भुगतान नहीं होने से फंसा है काम रिम्स में फायर सिस्टम रिफिलिंग का काम कर रहे युवक ने बताया कि प्रबंधन द्वारा फायर एक्सटिंग्विशर लगाने व रिफिलिंग का काम दिया गया था, लेकिन पैसा बकाया होने के कारण काम पूरा नहीं हो सका है। अभी भी प्रबंधन की ओर से करीब दो लाख का भुगतान लंबित है। युवक ने बताया कि रिम्स में अंतिम बार डेंटल कॉलेज, सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग, ट्रॉमा सेंटर व आंकोलॉजी बिल्डिंग में रिफिलिंग हुई थी। ओल्ड बिल्डिंग और हॉस्टलों में फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायर हो चुके हैं। ऐेसे में सवाल उठता है कि राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में ऐेसी लापरवाही कहां तक जायज है?

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