केंद्र और झारखंड सरकार ने नक्सलियों के खात्मे के लिए मार्च 2026 का टार्गेट तय किया है। इसे देखते हुए झारखंड और ओडिशा पुलिस संयुक्त अभियान छेड़ दिया है। दोनों राज्यों की सीमा पर आठ नए सुरक्षा कैंप खोले जा रहे हैं। इनमें पांच झारखंड में और तीन ओडिशा में हैं। क्योंकि अक्सर अभियान के दौरान नक्सली बॉर्डर इलाके को ही ठिकाना बनाते हैं। झारखंड में अब महज 80 से 85 नक्सली ही बच गए हैं। इनमें से 45 इनामी नक्सली हैं। सबसे अधिक करीब 65 नक्सली सारंडा में बचे हुए हैं। जिन्हें खत्म करने की पूरी रणनीति तैयार कर ली गई है। बोकारो, गिरिडीह, रांची, धनबाद, पलामू, लातेहार, सरायकेला, गढ़वा, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, चतरा, हजारीबाग आदि जिलों में अब इक्का-दुक्का नक्सली ही बचे हैं। नक्सलियों से झारखंड पुलिस बार-बार कह रही है कि वे सरकार की सरेंडर पॉलिसी का लाभ उठाएं और आत्मसमर्पण कर दे। अन्यथा अब पुलिस उनके खात्मे के लिए तैयार है। इस साल अक्टूबर तक राज्य में 32 नक्सली और उग्रवादी मारे जा चुके हैं। इससे झारखंड पुलिस का मनोबल काफी बढ़ा है। वे पूरे जोर-शोर से नक्सलियों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। ताकि तय समय तक झारखंड को नक्सलियों से मुक्त कराया जा सके। नक्सलियों का प्रतिरोध सप्ताह शुरू, 15 को बंद का आह्वान, अलर्ट पर पुलिस नक्सली झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और असम में 8 से 14 अक्टूबर तक प्रतिरोध सप्ताह मना रहा है। वहीं 15 अक्टूबर को एक दिवसीय बंद की घोषणा की है। इसे देखते हुए पुलिस सतर्क हो गई है। आईजी अभियान माइकल राज ने बताया कि नक्सल प्रभावित सभी क्षेत्रों में झारखंड पुलिस का अभियान जारी है। सभी संवेदनशील स्थानों, सरकारी कार्यालय, रेल व सड़क मार्ग पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई है। बंदी को लेकर आम जनता से अपील की गई है कि वे निर्भीक होकर अपना रोजमर्रा का कार्य करें। किसी तरह की परेशानी हो तो पुलिस को तुरंत सूचना दें। राज्य की जनता से यह भी अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार के अफवाहों पर ध्यान न दें। नक्सलियों का खाना-पानी रोकने की तैयारी इन सुरक्षा कैंप से नक्सलियों पर नजर रखी जाएगी। उनका खाना-पानी रोका जाएगा। सुरक्षा बलों ने खुफिया एजेंसियों से मिलीं सूचनाओं के आधार पर ही यह घेराबंदी की है। इन सुरक्षा कैंपों के बन जाने से नक्सली जंगल से बाहर नहीं निकल पाएंगे। उनके निकलने के सभी रास्तों पर सुरक्षा बलों नजर रहेगी। ऐसी स्थिति में नक्सलियों का राशन, पानी व दैनिक उपयोग की वस्तुओं का आवागमन रुक जाएगा। सुरक्षाबलों का मानना है कि राशन के लिए नक्सली जरूर जंगल से निकलने की कोशिश करेंगे। ऐसा करने पर सुरक्षाकर्मी उन्हें मार गिराएंगे।


