जिले के मनिका प्रखंड के धान क्रय केंद्रों में 3300 क्विंटल धान पड़ा हुआ है। इसके कारण धान खरीदने में समस्या हो रही है। किसानों ने बताया कि मिलर की लापरवाही के कारण उनके धान केंद्रों में पड़े हैं। इसके कारण वे न तो अपना धान बेच पा रहे हैं और न ही बेचे गए धान की द्वितीय किस्त का भुगतान हो पा रहा है। जानकारी के अनुसार मनिका प्रखंड के मटलौंग व कुई लैम्पस में धान क्रय केंद्र खोला गया है। जहां किसानों द्वारा 15 दिनों से बेचे गए धान को सरकार द्वारा खरीदा जा रहा है। मटलौंग लैम्पस प्रबंधक व धान क्रय केंद्र के प्रबंधक विजय यादव ने बताया कि 900 क्विंटल धान उनके यहां गोदाम में पड़ा हुआ है। मिलर प्रतिनिधि द्वारा विगत एक सप्ताह से किसानों द्वारा बेचे गए धान का उठाव करने को कहा जा रहा है। लेकिन धान का उठाव मिलर द्वारा नहीं किया जा रहा है। उल्टे बार-बार धान का उठाव करने की बात कहने पर मिलर लैम्पस प्रबंधक पर ही धौंस दिखाने लगता है। यही हाल कुई धान अधिप्राप्ति केंद्र का है। जहां 850 क्विंटल धान पड़ा हुआ है। इसका उठाव करने में मिलर द्वारा कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। किसान महरंग यादव, बली यादव, रामलाल उरांव, रामचंद्र पासवान, श्यामबिहारी यादव सहित कई किसानों ने बताया कि उनका धान केंद्र में ऐसे ही पड़ा हुआ है। इसके कारण बेचे गए धान की कीमत किसान को नहीं मिल पा रहा है। वही कई किसान धान केंद्र से धान को वापस भी ले जा रहे हैं। प्रखंड में मनिका लैम्पस से ही केवल एक बार धान का उठाव किया गया है। यहां भी 1500 क्विंटल धान मिलर की लापरवाही से पड़ा हुआ है। इससे प्रखंड के किसानों में काफी रोष देखा जा रहा है। इस सबंध में फोन करने पर मिलर प्रतिनिधि के द्वारा फोन रिसीव नहीं किया।


