पहाड़ों में बर्फबारी का असर लोगों की सेहत पर पड़ना शुरू हो गया है। तापमान में अधिक गिरावट नहीं है, बुधवार को न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री सेल्सियस रहा। लेकिन पहाड़ों में बर्फबारी के कारण ठंडी हवा चल रही है। यह ठंडी हवा जानलेवा साबित हो रही है। पिछले तीन दिनों में अस्पताल में मौसमी बीमारी के करीब 25% रोगी बढ़े हैं। छोटे बच्चे भी ठंड की चपेट में आने के बाद अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। वहीं, बुजुर्गों की बात करें तो पिछले तीन दिन में रिम्स में ब्रेन स्ट्रोक के 4 मरीज की मौत हो गई। जबकि शहर के अन्य 7 निजी अस्पतालों में 3 दिन में ब्रेन स्ट्रोक के कारण मरने वालों की संख्या 9 रही। रिम्स के न्यूरोफिजिशियन डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि बीते 3 दिन में ठंडी हवा के कारण स्ट्रोक के रोगी तो बढ़े हैं, लेकिन इनके बढ़ने का ग्राफ पिछले करीब 1 माह से ऊपर ही जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, सिर्फ रिम्स में 1 से 31 दिसंबर तक करीब 81 मरीज पहुंचे। इनमें करीब 35% यानी 29 मरीजों की मौत हो गई। रिम्स में पिछले एक साल में स्ट्रोक के 1380 रोगियों का हुआ इलाज : रिम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के हेड डॉ. सुरेंद्र कुमार के अुनसार, रिम्स में पिछले एक साल में स्ट्रोक के 1380 रोगी इलाज करा चुके हैं। बताया कि ठंड में संख्या बढ़ती है, अन्य दिनों में संख्या थोड़ी कम होती है। बच्चों में कान दर्द की समस्या बढ़ी, 7 दिन तक रह रहा बुखार
ईएनटी रोग विशेषज्ञ ने बताया कि मौसम के कारण बच्चों को कान में संक्रमण बढ़ा है। वातावरण में वायरस और बैक्टीरिया के कण बच्चों में कान के संक्रमण का मुख्य कारण हैं। इसकी वजह से उनके कान में दर्द शुरू हो रहा है। ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप सिंह ने कहा कि बच्चों में सर्दी, खांसी और कान दर्द जैसे शुरुआती लक्षणों का पता चलने पर तुरंत कुछ सावधानियां बरतना शुरू कर दें। ताकि संक्रमण का असर लंबे समय तक परेशान नहीं करे। छोटे बच्चों में कान में संक्रमण होने पर बॉडी में कुछ लक्षण दिखने लगते हैं, जैसे बुखार, सोने में कठिनाई होना व बिना किसी कारण के बच्चे का रोते रहना आदि। रिम्स व सदर अस्पताल में कान की समस्या लेकर 10 दिन में करीब 150 से ज्यादा रोगी ओपीडी में पहुंच चुके हैं। ऐसे ठीक हो सकता है स्ट्रोक
ब्रेन स्ट्रोक के ठीक होने की संभावना उस समय पर निर्भर करती है, जिसमें रोगी को उपचार दिया गया था। स्ट्रोक मस्तिष्क के नसों में ब्लॉकेज से होता है। कुछ मस्तिष्क की कोशिकाएं तो तुरंत ही मर जाती हैं, पर मस्तिष्क के कुछ हिस्से को वक्त पर नस को खोलने से पुनर्जीवित किया जा सकता है। इससे लकवे से बचाया जा सकता है। ठंड बढ़ने के बाद अस्पतालों में पिछले 7 दिन में पहुंचे मरीज अस्पताल मेडिसिन चाइल्ड ईएनटी स्ट्रोक के लक्षण: स्ट्रोक आने के बाद कई ऐसे लक्षण होते हैं। हाथ से लेकर पैर तक शरीर का एक हिस्सा लकवाग्रस्त होना, अचानक तेज सिर दर्द होना, बोलने में कठिनाई होना या मुंह का टेढ़ा होना भी स्ट्रोक के लक्षण हैं। डॉ. रजनीश कछारा के मुताबिक, एक रिसर्च में पाया गया कि भारत में स्ट्रोक के 30% मामलों का कारण हाई ब्लड प्रेशर है।


