भागाबांध से पंदनी होते हुए नारोडीह गांव को जाने वाली जोरिया में पुलिया है , पर संपर्क पथ नहीं है। इसके नहीं होने से इस मार्ग में पड़ने वाले 5 गांवों के करीब 2500 की आबादी को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। संयुक्त बिहार के जमाने मे इस जोरिया पर एक पुलिया का निर्माण कराया गया था, लेकिन 29 वर्षों के लंबे काल में बिहार सरकार से बनी यह पुलिया अब गिरने के कगार पर है। यूं कहें कि यह पुलिया अब किसी काम की नहीं रह गई है। नारोडीह के ग्रामीण मो फारूक , मो सुल्तान , ताहिर अंसारी मो अलाउद्दीन , मो कटी , मो लतीफ आदि ने बताया कि आज तक इस पुलिया से आवागमन की बेहतर सुविधा आसपास के लोगों को नसीब नहीं हुई है। जोरिया पर बना यह पुलिया धीरे-धीरे गिरने के कगार पर पहुंच चुका है। बताया गया कि इसकी मांग झारखंड बनने के बाद से लगातार की जा रही है बावजूद सरकार ने इस ओर अब तक ध्यान नहीं दिया, जिसका नतीजा है कि लोगों को पैदल पार कर अपने गांव तक जाना पड़ता है। पुलिया की जर्जर अवस्था तो है ही वहीं दोनों किनारों पर लोगों की सुविधा के लिए एप्रोच पथ नहीं रहने के कारण क्षेत्र के सैकड़ों लोग जोरिया के पानी में पैदल ही आना-जाना करना एक विवशता बनी हुई है। मोटरसाइकिल सवारों को भी पैदल ही पानी में उतरकर वाहन को पार कर जाना पड़ता है। पुलिया की मरम्मत व संपर्क पथ बनने से होती सहूलियत अगर पुलिया के साथ साथ संपर्क पथ बना दिया जाता तो आसपास के 5 गांवों के लोगों को काफी सहूलियत होती, लेकिन आज भी यहां की व्यवस्था बदली नहीं है । जबकि, राज्य सरकार प्रति वर्ष क्षेत्र में पुल और पुलिया के लिए लाखों रुपए खर्च करती है, लेकिन, इस और ध्यान नहीं दिया गया । इस कारण आज तक 5 गांव लोग सुविधाओं से वंचित है। इस रास्ते से गुजरना खतरनाक अगर आप बाइक सवार हैं या पैदल जा रहे हैं तो इस जोरिया पर संभल कर चलने की जरूरत है अन्यथा नुकीले पत्थरों से टकराकर चोटिल हो सकते है। खासकर रात के वक्त इधर से गुजरना खतरों से खाली नहीं। क्योंकि जैसे ही आप पानी में उतरेंगे आपको सतर्क होकर जाना होगा नहीं तो किसी विषैले जीव के काटने पर आपकी परेशानी और भी बढ़ सकती है। इन गांवों के लोग प्रभावित इस जोरिया पर पुलिया की व्यवस्था नहीं होने से आसपास के पांच गांव के 25 सौ लोग प्रभावित हो रहे हैं। इनमें भागाबांध , पंदनी, सबनपुर नारोडीह, कुरता गांव के लोग प्रभावित हैं।


