ब्रह्मज्ञान प्राप्ति के बाद ही जीवन में वास्तविक भक्ति शुरू होती है। इसकी स्थिरता से ही जीवन भक्तिमय और आनंदमय बनता है। सद््गुरु माता सुदीक्षा महाराज के संदेश को साझा करते हुए नववर्ष के शुभारंभ पर नामकुम में आयोजित विशेष सत्संग को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। बहन ललित सूद ने ईश्वरीय ज्ञान के महत्व को समझाते हुए कहा कि ब्रह्मज्ञान का अर्थ हर पल उसके प्रकाश में जीना है और यह अवस्था हमारे जीवन में तभी आती है जब यह निरंतर हो, इससे सही मायनों में मुक्ति मिलती है। जीवन का वास्तविक उद्देश्य माया के प्रभाव से खुद को बचाना और जीवन के उद्देश्य को समझना है, जो कि ईश्वर को जानना है। इस संसार में निरंकार और माया दोनों की उपस्थिति निरंतर बनी रहती है। बहनजी ने मुक्ति के मार्ग का उल्लेख करते हुए कहा कि मुक्ति केवल उन्हीं संतों को प्राप्त होती है, जिन्होंने ब्रह्मज्ञान को सही मायने में समझ लिया है और उसे जीवन में अपना लिया है। वह इंसान मुक्ति का हकदार है।


