भास्कर न्यूज| लुधियाना जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नाकर सूरीश्वर जी की 10वीं पुण्य तिथि पर 1 जनवरी को लुधियाना के श्री आदिनाथ जैन मंदिर, सिविल लाइन्स में एक भव्य गुणानुवाद सभा का आयोजन किया। इस अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने अपने गुरुदेव की शिक्षाओं और साधना से प्रेरणा ली। आयोजन में प्रमुख रूप से परम पूज्य जैनाचार्य श्रीमद् विजय धर्मधुरंधर सूरीश्वर जी महाराज और साधु-साध्वीवृंद ने अपनी पावन निश्रा प्रदान की। श्रीमद् विजय रत्नाकर सूरीश्वर जी, कोंकण देशदीपक के रूप में प्रसिद्ध थे और उनकी शिक्षाओं का समाज में गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने अपनी जीवनशैली से धर्म, संयम, और साधना का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका जीवन जैन धर्म के सिद्धांतों के प्रति निष्ठा और समर्पण का प्रतीक था। वे जिनबिम्ब और जिनागम के सच्चे प्रेरक थे, जिन्होंने समाज को संयम साधना और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में मार्गदर्शन दिया। उनकी 10वीं पुण्य तिथि पर, उनके अनुयायी और श्रद्धालु विभिन्न स्थानों पर उनके मंदिरों में एकत्र हुए, जिसमें वलसाड, अंबाला, लुधियाना और पंजाब के जीरा के लहरा गांव में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लहरा गांव में एक भव्य मंदिर का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है, जो उनके योगदान और शिक्षाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का कार्य करेगा। उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर हम अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध कर सकते हैं, और समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।


