न्याय के इंतजार में बीत गए 11 साल:1942 में माना एयरपोर्ट के नाम पर 10.66 एकड़ जमीन ली, पर न मुआवजा दिया, न ही जमीन लौटाई

राजधानी से सटे आरंग ब्लॉक के रमचंडी गांव में 83 साल पुराने जमीन विवाद ने सरकारी तंत्र की लापरवाही का उदाहरण पेश किया हैै। 80 साल का किसान अपने पूर्वजों की यह जमीन पाने राजस्व न्यायालयों का चक्कर काट रहा है। किसान समारू के मुताबिक 1929-30 के भू-अभिलेखों में खसरा नंबर 200 की करीब 31 एकड़ जमीन नाना कविदास के नाम से दर्ज है और वे पहले से ही इसमें काबिज थे। 1942-43 में माना एयरपोर्ट के निर्माण के समय इस खसरे की भूमि में से 10.66 एकड़ भूमि अधिग्रहण कर लिया गया। लेकिन न तो इससे संबंधित रिकॉर्ड है और न ही अधिग्रहण से संबंधित कोई दस्तावेज, न तो किसान को एक रुपए मुआवजा दिया गया। हैरानी की बात है कि जब पीड़ित पक्ष ने जानकारी मांगी तो एयरपोर्ट प्रबंधन ने लिखित में कहा कि यह जमीन एयरपोर्ट की है ही नहीं। वहीं, किसी भी विभाग के पास न तो अधिग्रहण की फाइल मिली, न भुगतान संबंधी कोई दस्तावेज और न ही इससे संबंधित कोई आदेश। आज भी यह जमीन खाली पड़ी है और कभी किसी सरकारी प्रोजेक्ट में उपयोग तक नहीं हुई। बेटी को कैंसर, मुआवजा दे या जमीन वापस करे सरकार जमीन वापस पाने के लिए जब कोई रास्ता नहीं मिला तो साल 2014 में मैंने राजस्व मंडल में इसकी शिकायत दर्ज कराई। साल 2018 में राजस्व मंडल ने कलेक्टर को स्पीकिंग ऑर्डर देने कहा। मामले की जांच कराई गई। साल 2020-21 में राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और एसडीएम तीनों ने अपनी जांच में कहा कि भूमि का अधिग्रहण नहीं हुआ है और न ही मुआवजा भुगतान। वर्तमान में जमीन का उपयोग भी नहीं हो रहा है। इस जांच के बावजूद बिना स्पष्ट कारण बताए साल 2022 में किसान की अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद मामले में संभाग आयुक्त के पास अपील की गई, लेकिन आयुक्त ने फाइल फिर से कलेक्टर को वापस भेज दी। मैं लगभग रोज कलेक्टोरेट का चक्कर काट रहा हूं। जमीन कहां गई कोई बताने वाला नहीं है। मुझे न तो जमीन वापस मिल रही है और न ही मुआवजा। बस फाइलें घूम रही है। मेरी बेटी को कैंसर है, जिसके इलाज में अब तक लाखों रुपए खर्च हो चुके हैं। मुआवजा ही मिल जाता तो पैसों की जरूरत पूरी हो जाती। या फिर जमीन वापस मिले तो मैं रोजी-रोटी चलाकर बेटी का इलाज करा लेता।
-जैसा कि पीड़ित किसान समारू ने भास्कर को बताया। 13 साल से भटक रहीं एक और बुजुर्ग
रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे में धरसींवा ब्लॉक के सांकरा गांव में स्थित जमीन को साल 2012 में एनएच ने अधिग्रहित कर लिया। वहीं सड़क और जमीन के बीच कई मकान हैं, जिसे अधिग्रहित नहीं किया गया है। अपनी जमीन को पाने रायपुर के 78 वर्षीय बुजुर्ग ज्योति आहूजा पिछले भटक रही हैं। जल्द ही निराकरण कर लिया जाएगा
मामला आया है, जिसके सभी तथ्यों की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद जल्द ही इस मामले का निराकरण कर लिया जाएगा।
– डॉ. गौरव कुमार सिंह, कलेक्टर रायपुर

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