अमृतसर| जय कृष्णी साहित्य अपने आप में एक विशाल साहित्य है। जय कृष्णी परंपरा में अनेकों काव्य ग्रंथ, चरित्रात्मक ग्रंथ, नैतिक ग्रंथ और गद्यात्मक ग्रंथों का समावेश है। जय कृष्णी परंपरा में बहुत सारी आरतियों और भजनों को लिखा गया है। चौक पासियां स्थित जय कृष्णी परंपरा के प्राचीन मंदिर जय कृष्णियां में नए वर्ष के उपलक्ष्य में दाहीकी लीला स्तोत्र का प्रकाशन किया गया। यह संकट निवारण स्तोत्र मराठी भाषा में हैं। प्रकाशन समारोह के आरंभ में ठाकुर जी को विडा समर्पित किया गया। मंदिर के संचालक दर्शनाचार्य सागर मुनि शास्त्री जी ने कहा कि आज का युग विज्ञान और आधुनिकता का युग है। यदि आज का युवा वर्ग विज्ञान को साथ में रख कर धर्म का प्रचार करने का संकल्प करता है तो हम समाज और राष्ट्र को समृद्ध बना सकते हैं। प्रकाशन समारोह के दौरान मंदिर के वरिष्ठ कार्यकर्ता कीमती लाल गुलाटी, रजत महाजन, सिद्धांत, राजन वर्मा, गौतम सरीन, अमित शिंगारी आदि भक्त मौजूद थे।


