छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के ग्राम पंचायत बगिया के 20 में से 16 पंचों के इस्तीफे का पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। यह पंचायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का गृहग्राम है। बगिया पंचायत में सीएम साय की (छोटे भाई की पत्नी) बहू राजकुमारी साय सरपंच हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसी पंचायत के पंच के रूप में अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। इस्तीफे का पत्र छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। जानकारी के मुताबिक, जशपुर जिले के ग्राम पंचायत बगिया के पंचों के सामूहिक इस्तीफे का लेटर सोशल मीडिया में पोस्ट कर दावा किया है कि पंचायत के 20 में से 16 पंचों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा पंचायत की सरपंच को संबोधित करते हुए दिया गया है। 20 में से 16 पंचों के हस्ताक्षर
वायरल इस्तीफा पत्र में कहा गया है कि पंचायत में सरपंच अपने मनमाने काम करा रहे हैं। न तो पंचों को पूछा जा रहा है और न ही बताया जा रहा है। हमारे पंच होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इस कारण हम सभी त्यागपत्र दे रहे हैं। वायरल इस्तीफा पत्र में पंचायत के 20 वार्ड पंचों में से 16 के हस्ताक्षर हैं। इनमें पंच हीरालाल साय, सुकांती बाई, रविंद्र राम, सुनीता बाई, कुंतला चौहान, मनपुरन राम, जूलिका बाई, बालकेश्वर साय, अलका केरकेट्टा, दिलमुनी बाई, हीरालाल साय, अवधेश राम, अमर दीपक खलखो, विमला बाई, धनमेत बाई एवं सीमा पैकरा के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस ने साधा सीएम पर निशाना
पंचों के इस्तीफे का पत्र छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया है। कांग्रेस ने लिखा है- मुख्यमंत्री के अपने ही गांव में विकास की पोल खुल गई। उप सरपंच व पंचों ने काम न होने से तंग आकर सामूहिक इस्तीफा दे दिया। जब मुख्यमंत्री के गृहग्राम की ये हालत है तो बाकी प्रदेश का अंदाजा खुद लगा लीजिए। सरकार सिर्फ भाषण दे रही है, जमीन पर विकास शून्य है। भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा-जानकारी नहीं मिली है
मामले में जानकारी के लिए सरपंच राजकुमारी साय से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। मामले को लेकर जशपुर के भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह ने कहा कि मेरी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है। पता करके बता सकूंगा। नीचे देखें इस्तीफा पत्र वहीं कुछ भाजपा नेताओं ने इस्तीफा पत्र वायरल होने के बाद कहा है कि यह फर्जी है। उन्होंने बताया कि पत्र में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और उन्होंने इस बात का प्रमाण भी सरपंच को दिया है। हालांकि, वे पंचों का पूरा पत्र दिखा नहीं सके।


