पुरानी पाइपलाइन बेदम, नई अधूरी, 50 की जगह 40 एमजीडी आपूर्ति

रांची की सबसे बड़ी शहरी जलापूर्ति योजना अब दम तोड़ने लगी है। रूक्का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और इससे जुड़ी पाइप लाइन अब अपनी लाइफ खो चुकी हैं। यह 1972 में बनी थी, मगर आज भी इसी सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जलापूर्ति व्यवस्था चल रही है। जिस समय पाइप लाइन बिछी थी, उस समय तो वह जमीन से एक-दो फीट ही अंदर थी। लेकिन सड़क बनते-बनते वह 10 से 12 फीट तक नीचे चली गई है। अगर लीकेज हो तो उसे दुरुस्त करने के लिए इतने गहरे तक खुदाई करनी पड़ती है, जिसमें काफी समय लग जाता है। रूक्का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से प्रतिदिन 40 एमजीडी पानी शहर के 90 प्रतिशत इलाके में आपूर्ति होती है। जबकि रोज 50 एमजीडी पानी चाहिए। अगर एक दिन भी लीकेज या प्लांट में समस्या उत्पन्न हो जाए तो दो से तीन दिन तक वाटर सप्लाई ठप हो जाती है। 1972 में रूक्का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जो राइजिंग पाइप लाइन बूटी जलागार तक बनी थी, वह सीआई (कास्ट आयरन) पाइप से बनी थी। जिसकी लाइफ लाइन अधिक से अधिक 40 साल होती है। यानि पाइप अपनी लाइफ से अधिक चल चुके हैं।
पिस्का मोड़ क्षेत्र : रातू रोड लाइन से बाइपास होकर ही पानी आता है
पिस्का मोड़ जलमीनार में भी रातू रोड लाइन से बाइपास होकर पानी आता है। पिस्का मोड़, हेहल, हेसल, बैंक कॉलोनी, मेट्रो गली, दयाल नगर, लक्ष्मी नगर, पंडरा, इटकी रोड इलाके में इस जलमीनार से आपूर्ति होती है। मगर रातू रोड लाइन से पर्याप्त पानी नहीं मिलता। हालांकि रिंग रोड की नई लाइन से पानी आने से राहत है। केस स्टडी 1: रातू रोड जलमीनार को 6 से 7 घंटे पानी चाहिए, नहीं मिलता रातू रोड क्षेत्र में पूर्ण आपूर्ति के लिए बूटी से कम से कम 6-7 घंटा पानी मिलना चाहिए, मगर कभी दो तो कभी तीन से चार घंटे ही पानी आता है। इस क्षेत्र में रातू रोड दाएं एवं बाएं के मोहल्ले, हरमू रोड, किशोर गंज, आनंद नगर, कुम्हार टोली, पहाड़ी मंदिर एरिया, कैलाश नगर, महुआ टोली व आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। नई जलापूर्ति योजना : बार-बार फेल हो रही डेडलाइन शहरी जलापूर्ति योजना अब पेयजल विभाग से हटाकर नगर विकास की एजेंसी जुडको को सौंप दी गई है। जुडको ने वर्ष 2035 का लक्ष्य तय कर नई शहरी जलापूर्ति योजना पर काम शुरू किया। इसके तहत पूरे शहर एवं शहरी क्षेत्रों से सटे प्रस्तावित ग्रेटर रांची इलाके में कई जलमीनार बनाई गई। बोड़ेया के चिरौंदी पहाड़ में बूटी से भी बड़ा जलागार बनाया जा रहा है। इसके प्रथम फेज का काम पहले 2022 में पूरा होना था। फिर 2024, इसके बाद 2025 तय की गई। अब अप्रैल 2026 नई डेडलाइन है। नए जलापूर्ति सिस्टम से ही राहत ड्राइ जोन इलाके में होती है लोगों को समस्या बकरी बाजार में नई जलमीनार तैयार, पानी नहीं। प्रभु शंकर राम, सेवानिवृत्त इंजीनियर, पीएचईडी 10 फीट खोदकर पुरानी पाइप लाइन की मरम्मत।

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