देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में रविवार को नवान्न पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं की ऐसी अभूतपूर्व भीड़ देखी गई। सुबह से ही कांवड़िया पथ से लेकर गर्भगृह तक भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। हजारों की संख्या में लोग अपने खेतों की पहली फसल लेकर पहुंचे और ‘साकल’ बनाकर बाबा भोलेनाथ को अर्पित किया। चावल, गुड़, घाघरा, मूली और अन्य खेती की उपज से बना यह साकल भक्तों के लिए वर्षभर सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक माना जाता है। बाबा को नई फसल अर्पित करने की यह परंपरा सदियों पुरानी है। यह विश्वास जुड़ा है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत बाबा के आशीर्वाद के बिना अधूरी है। नई फसल अर्पित करने से मिलती है खुशहाली बाबा बैद्यनाथ धाम में नवान्न पर्व का अलग ही महत्व है। स्थानीय पुरोहितों के अनुसार, यह परंपरा बहुत प्राचीन है और पीढ़ियों से भक्त इसे निभाते आ रहे हैं। पुरोहित बताते हैं कि नई फसल को सबसे पहले भगवान को अर्पित करने से वर्षभर अच्छी उपज होती है। घर-परिवार में शांति बनी रहती है। इस पर्व में देवघर के अलावा दुमका, गोड्डा, जमुई, बांका, गिरिडीह समेत आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। कांवड़िया पथ पर भक्तों की आवाजाही लगातार जारी रही। हर श्रद्धालु अपनी क्षमता और आस्था के अनुसार नई फसल लेकर पहुंचा और गर्भगृह में बाबा के चरणों में अर्पित किया। जल, बेलपत्र और नए अनाज की पूजा के साथ मंदिर परिसर में घंटियों और मंत्रोच्चार की गूंज पूरे वातावरण को भक्तिमय करती रही। भुजदान की परंपरा निभाई गई श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पहले से ही सतर्क दिखा। मंदिर परिसर में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी। प्रवेश और निकास मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई और भक्तों की कतार को व्यवस्थित ढंग से गर्भगृह तक पहुंचाया गया। भीड़ के बावजूद पूजा-अर्चना शांतिपूर्वक संपन्न हुई। उधर, नवान्न पर्व का उत्साह सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं रहा। देवघर के घर-घर में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। नई फसल बाबा को समर्पित करने के बाद लोगों ने ‘भुजदान’ की वर्षों पुरानी परंपरा निभाई, जिसके तहत गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराया गया।


