भास्कर न्यूज | मनेंद्रगढ़ मनेंद्रगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत बंजी, बुंदेली, पाराडोल, नारायणपुर, छिपछिपी, भौता और तेंदूडांड के 200 से अधिक किसान धान की फसल बेचने के लिए भटक रहे हैं। इसकी वजह है कि उनकी कब्जे की वन भूमि का भौतिक सत्यापन अभी तक नहीं हुआ, जबकि अंतिम तिथि केवल दो दिन शेष रह गई है। गिरदावरी के समय वन भूमि का भौतिक सत्यापन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें पटवारी और वन विभाग के अधिकारी मिलकर भूमि की वास्तविक स्थिति, फसल का प्रकार और भूमि के उपयोग को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करते हैं। इस वर्ष भौतिक सत्यापन की अंतिम तिथि 25 नवंबर निर्धारित की गई थी। 15 नवंबर से धान खरीदी केंद्रों में जब खरीदी शुरू हुई, तो किसान जब टोकन लेने पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि उनकी भूमि का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ है। शनिवार को कई किसान मनेंद्रगढ़ तहसील कार्यालय पहुंचे। ग्राम बंजी निवासी कुंवर सिंह, उमेश सिंह, राम कुमार, दलबीर सिंह और तिलक राज ने बताया कि उनकी भूमि पर धान की खेती की गई थी और इस वर्ष फसल बेचने के लिए वे अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। तहसीलदार के पास जाने पर एग्रीस्टैक का स्टेटमेंट मांगा गया, जिसे दिखाने पर खाद्य अधिकारी के पास जाने के लिए कहा गया। खाद्य अधिकारी कार्यालय नहीं मिले, इसलिए अब सोमवार को वे वहां जाएंगे। किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष भी उनकी भूमि पर धान की खेती हुई थी, बिक्री हुई थी।


