दिगंबर जैन साधु बिना पिच्छी के सात कदम भी नहीं चल सकते। मोर पंख से बनी पिच्छी उन्हें हर क्रिया में सावधानी बरतने की याद दिलाती है। माना जाता है कि मोर एकमात्र ऐसा जीव है जो रतिक्रिया नहीं करता, बल्कि मोरनी मोर के आंसू पीकर गर्भवती होती है। इसलिए ब्रह्मचर्य के आराधक मुनियों के लिए मोर पंख की पिच्छी विशेष रूप से उपयुक्त मानी गई है। श्री दिगंबर जैन पंचायत द्वारा मंदिर सभागार में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन जारी रखते हुए आचार्य 108 सागर महाराज के प्रभावक शिष्य 108 सुतीर्थ सागर महाराज ने यह बात कही। संक्षेप में जैन मुनि की पिच्छी उनके जीवन शैली के मूल सिद्धांतों अहिंसा, अपरिग्रह और संयम का मूर्त रूप है। मुनिश्री ने समाज की महिलाओं से आग्रह किया कि वह घर पर बच्चों को संस्कार दें और उनके प्रति अपने कर्तव्यों का अच्छे से निर्वाह करें, ताकि एक सुदृढ़ भविष्य का निर्माण हो। मंगलाचरण के बाद मुनिश्री का पिच्छिका परिवर्तन हुआ। आध्यात्मिक शुद्धि, कर्मों से मुक्ति और नैतिक जीवन जीना मूल सिद्धांत : दीपिका समियाश्री रांची | श्वेतांबर जैन साध्वी शासन दीपिका समियाश्री ने कहा कि जैन धर्म मूल सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें मुख्य रूप से आध्यात्मिक शुद्धि, कर्मों से मुक्ति और नैतिक जीवन जीने पर जोर दिया गया है। सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और अहिंसा का पालन सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है। साध्वीश्री ने नाना गुरुदेव की चिंतामणियों का भी पाठ कराया। श्री जैन श्वेतांबर साधुमार्गी संघ रांची के आचार्यश्री 1008 रामलाल की आज्ञानुवर्ती साध्वियों शासन दीपिका समियाश्री कामनाश्री, सुधृतिश्री और इहिताश्री ने रविवार को रांची शहर में मंगल प्रवेश किया। समता युवा संघ के अध्यक्ष राकेश ने बताया कि सािध्वयों के प्रवास के दौरान रोज सुबह 9 बजे से 10 बजे तक प्रवचन होगा। दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक धर्म चर्चा होगी।


