झारखंड में फैक्ट्री कामगार 3 माह में 75 की जगह 125 घंटे कर सकेंगे ओवर टाइम

ओवर टाइम की मजदूरी दोगुना मिलने की व्यव​स्था जारी रहेगी झारखंड में कारखाने में काम करने वाले कामगारों की ओवर टाइम की सीमा बढ़ेगी। राज्य सरकार पांच दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इसके लिए कारखाना अधिनियम (1948) संशोधन विधेयक-2025 पारित कराएगी। इस विधेयक का ड्राफ्ट तैयार है। अधिनियम बनने के बाद फैक्ट्री में काम करने वाले कामगार तीन महीने में 125 घंटे तक ओवर टाइम कर सकेंगे। अभी यह सीमा 75 घंटे निर्धारित है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी आेवर टाइम के लिए दोगुना मजदूरी मिलने की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के इस कदम का उद्देश्य कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण बनाना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। इससे राज्य में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। कंपनी प्रबंधन को भी उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने और उसे पूरा करने में सहूलियत होगी। साथ ही श्रमिकों की आय भी बढ़ेगी। दरअसल केंद्र सरकार ने अभी श्रम सुधार के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। उसी के अनुरूप झारखंड में भी ऐसी व्यवस्था की जा रही है। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टील ओर ऑटो सेक्टर में लगातार बढ़ती मांग के कारण उत्पादन शेड्यूल को लचीला बनाना समय की जरूरत है। दुनिय तेजी से बदल रही है। कई देशों में ओवर टाइम के घंटे भारत से ज्यादा है। यह सुधार उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाएगा। 1.80 लाख कामगारों को मिल सकता है लाभ एक रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में कारखाना कामगारों की संख्या करी 1.80 लाख है। जरूरत पड़ने पर इन्हें अतिरिक्त ओवर टाइम का लाभ मिल सकता है। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने तीन दिन पहले चार लेबर कोड लागू की है। इन सुधारों में गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा, सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र और कांट्रैक्ट कर्मचारियों को स्थाई कर्मचारियों जैसी सुविधाएं शामिल हैं। ग्रेच्युटी के लिए पांच साल की अनिवार्यता अब नहीं रही और ओवर टाइम के भुगतान के नियम भी बदले गए हैं। मार्च में कैबिनेट से मिली थी स्वीकृति इस प्रस्ताव पर मार्च में कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी। लेकिन सरकार ने इसे विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश ​नहीं किया। अब इसे अधिनियम बनाकर पूरे राज्य में लागू करने की तैयार है। राज्य का श्रम विभाग विधेयक के प्रारूप को जल्दी ही विधि विभाग को भेजेगा। इसके ​बाद विधि विभाग इसे विधानसभा में पेश करेगा। विधानसभा से विधेयक पास होने के बाद राज्यपाल की स्वीकृति लेनी होगी। फिर इस पर राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होगी या नहीं, इसका अध्ययन किया जा रहा है। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है ओवरटाइम रहेगा स्वैच्छिक, मजदूर की सहमति जरूरी नए विधेयक में यह साफ किया गया है कि किसी भी कर्मचारी को उसकी इच्छा के बिना ओवरटाइम करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। इसके लिए पहले कर्मचारी की लिखित सहमति लेनी होगी। ओवरटाइम के लिए दोगुनी मजदूरी पहले की तरह जारी रहेगी। फैक्ट्री प्रबंधन को ओवरटाइम का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। इस नियम के लागू होने से मजदूरों की कमाई तो बढ़ेगी ही, उद्योगों में उत्पादन क्षमता में भी सुधार होगा। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में आएगा बिल सप्ताह में 48 घंटे की ड्यूटी जरूरी सामान्यत: प्रतिदिन आठ घंटे का ड्यूटी का प्रावधान है। एक सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे सामान्य ड्यूटी अवधि है। लगातार 6 कार्य दिवस के बाद एक दिन का साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य है। इससे अधिक समय तक काम ओवर टाइम की श्रेणी में आता है। इस पर दोगुना भुगतान किया जाता है।

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