जांच की जांच-3:चालू मशीनों के लिए भी रीएजेंट नहीं, 2 साल से अस्पतालों में खून जांच बंद

राज्य के सरकारी अस्पतालों में खून की जांच करने हर साल औसतन 200 करोड़ रुपए के री-एजेंट केमिकल की जरूरत पड़ती है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग पिछले दो साल में एक रुपए की भी खरीदी नहीं कर सका है। खानापूर्ति के लिए खून जांचने वाली अलग-अलग किस्म की मशीनों के री-एजेंट खरीदने एक साल में 5 बार टेंडर जारी निकाले गए। बाद में अलग-अलग कारण बताकर इन्हें निरस्त कर दिया गया। कभी बताया गया कि टेंडर में एक ही कंपनी ने हिस्सा लिया, इसलिए निरस्त करना पड़ा। किसी टेंडर को तकनीकी कारण बताकर अधूरे में कैंसिल किया गया। दरअसल 400 करोड़ से ज्यादा का री-एजेंट घोटाला करने वाली मोक्षित कंपनी को बाहर रखना है, इसलिए सीजीएमएससी ओपन टेंडर कर रहा है और प्रक्रिया कागजों में ही उलझी हुई है। नतीजतन ग्रामीण हेल्थ सेंटरों में एक तरफ जहां सीबीसी और माइक्रोबायोलॉजी मशीनें बंद होने के कारण खून की जांच नहीं हो पा रही है, वहीं जहां मशीनें चालू हैं वहां री-एजेंट नहीं होने के कारण मरीजों को लौटाया जा रहा है। भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि करीब एक साल से स्वास्थ्य विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन सीजीएमएससी री-एजेंट खरीदी के लिए अलग-अलग टेंडर प्रक्रिया कर रहा है। कांग्रेस शासनकाल में सीजीएमएससी में एक तरह से मोक्षित कार्पोरेशन का ही वर्चस्व था। मोक्षित कंपनी ही मशीनों की सप्लाई के साथ-साथ री-एजेंट भी सप्लाई कर रही थी। इस बार मोक्षित कार्पोंरेशन को टेंडर प्रक्रिया से बाहर रखना है। इस वजह से ओपन टेंडर जारी किया गया। सीबीसी और सेमी ऑटोमेटिक माइक्रोबायोलॉजी मशीनों के लिए पिछले साल नवंबर-दिसंबर में पहली बार टेंडर जारी किया गया। पहले टेंडर में ओपन टेंडर के नियमानुसार 3 कंपनियां नहीं आईं। इसलिए प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी। दूसरी बार में एल-1 को टेंडर देने की प्रक्रिया शुरू की गई तो पता चला कि तकनीकी डेटा और प्राइस बीट में अंतर है। इस वजह से उस टेंडर को भी निरस्त करना पड़ गया। बाकी ऐसी मशीनें जो पूरी तरह प्रोप्रायटरी हैं, उनका टेंडर तीन बार जारी किया गया। तीनों बार टेंडर निरस्त करना पड़ा क्योंकि एक ही कंपनी ने हिस्सा लिया। री-एजेंट का टेंडर फायनल होगा तो बंद मशीनें भी होंगी चालू क्योंकि… री-एजेंट का टेंडर फायनल होने पर ग्रामीण इलाकों के हेल्थ सेंटरों में जो मशीनें मोक्षित कंपनी के इंजीनियरों ने बंद की हैं वे चालू भी हो जाएंगी। क्योंकि सीजीएमएससी ने यही शर्त रखी है कि सीबीसी और सेमी ऑटोमेटिक माइक्रोबायोलॉजी मशीनों में सप्लाई होने वाले री-एजेंट का टेंडर उसी कंपनी को दिया जाएगा जो हेल्थ सेंटरों में बंद पड़ी मशीनों को चालू करेगा। मशीनें चालू करने की शर्त पर ही टेंडर दिया जाएगा।
मोक्षित की चालाकी, ऐसी मशीन सप्लाई की जो उसी री-एजेंट से चलेगी जिसने मशीन बनाई
पड़ताल में पता चला है कि सरकारी हेल्थ सेंटरों में खून जांच के लिए 9 अलग-अलग किस्म की मशीनें मोक्षित कंपनी ने सप्लाई की है। अफसरों के अनुसार इनमें 7 किस्म की जो मशीनें हेल्थ सेंटरों में लगी है वे पूरी तरह से प्रोप्रायटरी हैं यानी उन मशीनों में उसी कंपनी का री-एजेंट उपयोग में आएगा जिस कंपनी ने मशीनें बनाईं हैं। ये मशीनें विदेशी कंपनी की हैं। इस वजह से इनका ओपन टेंडर सफल नहीं हो पा रहा है। कोई कंपनी री-एजेंट सप्लाई करने आ ही नहीं रही है। जबकि दो किस्म की मशीनें सीबीसी और सेमी ऑटोमेटिक माइक्रोबायोलॉजी को मोक्षित ने अपनी खुद की कंपनी की बताया है। हालांकि उसने ये दूसरी कंपनी से खरीदकर सप्लाई की थी। इस वजह से इन दोनों मशीनों को चालू करना आसान है। अफसरों का कहना है ये मशीनें चालू होने से हेल्थ सेंटरों में 85 किस्म की जांचें होने लगेंगी। मशीनें जल्द चालू होंगी, ट्रायल चल रहा है अभी
सीबीसी और सेमी ऑटोमेटिक माइक्रोबायोलॉजी मशीनों का टेंडर लगभग फाइनल हो गया है। मशीनों को चालू करने का ट्रायल किया जा रहा है। जल्द ही इनके चालू होने से जांचें शुरू हो जाएंगी।
-रितेश अग्रवाल, एमडी सीजीएमएससी

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