जिले में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। शाम के बाद ठंड बढ़ गई है। बढ़ती ठंड को लेकर मौसम विभाग ने और अधिक तापमान गिरने का अनुमान जताया है। बताया जा रहा है कि नवंबर माह के अंत में जिले का तापमान 11 डिग्री तक हो जाएगी। इस बढ़ती ठंड में जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से 10 तक के बच्चों को स्वेटर नहीं मिला है। जबकि जिले के 1553 सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से 12वीं तक के एक लाख 36 हजार से अधिक छात्र-छात्रा पढ़ाई कर रहे हैं। बच्चों को स्वेटर की राशि का वितरण नहीं होने से वह ठंड में ही स्कूल जाने को विवश हैं। जबकि नवंबर महीना बीतने को है। इसको लेकर विभाग का कहना है कि राज्य सरकार से ही राशि का आंवटन प्राप्त नहीं हुआ है। इसके कारण राशि का वितरण नहीं किया गया है। लेकिन विभाग से राशि का आवंटन नहीं होने और बच्चों को देरी से राशि मिलने से ठंड में बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कक्षा 5 तक को 600 और 12वीं तक को 860 रुपए ठंड के मौसम में हर साल जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को स्वेटर खरीदने के लिए राशि दी जाती है। इसमें स्वेटर के लिए कक्षा 1 से 5वीं तक के बच्चों को 600 रुपए और कक्षा 6 से 12वीं तक के बच्चों को 860 रुपए दिए जाते हैं। इसमें कक्षा 1 से 2 के बच्चों को एसएमसी के खाता में और कक्षा-3 से 12वीं तक के बच्चों के बैंक खाता में राशि भेजी जाती है। इस तरह स्वेटर का पैसा नहीं मिलने से बच्चे सुबह ठंड में ही स्कूल जाने को विवश हैं। जरूरतमंदों को कंबल वितरण भी नहीं स्कूल में विना स्वेटर के बच्चे। जिले के गरीब, वृद्ध के लिए जिला प्रशासन की ओर से कंबल की अभी तक व्यवस्था नहीं की गई है। जिला प्रशासन कंबल वितरण की दिशा में अभी तैयारी ही शुरूआत नहीं की है। जबकि तापमान में हर दिन कमी आ रही है। 22 नवंबर से न्यूनतम और अधिकतम तापमान में कमी आएगी। जबकि बीते साल 2024 में भी जिले में देर से कंबल का वितरण हुआ था। इसी साल सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा जिले के 57 हजार से अधिक जरूरतमंदों को कंबल दिया गया था। इसके अलावा समाजसेवी, सामाजिक संस्था द्वारा भी कंबल वितरण किया गया था। लेकिन इस साल अब तक कंबल खरीदने का टेंडर भी नहीं हुआ है। जिले में बढ़ती ठंढ के बाद भी अभी तक जिला प्रशासन द्वारा चौक-चौराहों में अलाव की भी व्यवस्था नहीं की गई है, ताकि राहगीरों को ठंड में राहत मिले। इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से पूछने पर राज्य सरकार से निर्देश आने की बात कहती है। बता दें कि पिछले कई साल से कंबल का वितरण आधी ठंड गुजर जाने के बाद की जाती है।


