तिलक जंजू राखा प्रभ ता का। कीनो बडो कलू महि साका।। साधन हेति इती जिनि करी। सीसु दीया परु सी न उचरी।।

लुधियाना, मंगलवार 1675 में मुगल शासक औरंगजेब ने जबरदस्ती धर्म परिवर्तन शुरू किया तो कश्मीरी पंडित किरपा राम दत्त की अगुवाई में आनंदपुर साहिब में श्री गुरु तेग बहादुर जी से मिले। गुरु जी ने कहा कि औरंगजेब से कहो- अगर गुरु जी का धर्म बदल दे तो वह सभी अपना धर्म बदल लेंगे। इसके बाद गुरु जी दिल्ली के लिए चल पड़े। रास्ते में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। औरंगजेब उनका धर्म​ बदलने में नाकामयाब रहा तो दिल्ली के चांदनी चौक में पहले गुरु जी के अनुयायी भाई मती दास, भाई सती दास और भाई दयाला जी को शहीद कर दिया गया। उसके बाद सार्वजनिक तौर पर श्री गुरु तेग बहादुर जी का शीश धड़ से अलग करके उन्हें भी शहीद कर दिया गया। 25 नवंबर, 2025 भाई दयाला जी… भाई दयाला जी श्री गुरु तेग बहादुर जी के विश्वासपात्र और अटल सेवादार थे। वह कई यात्राओं में गुरु जी के साथ रहे। दिल्ली में उन पर भी काफी जुल्म हुए और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला गया। सजा के तौर पर उन्हें देग में उबालकर शहीद​ कर दिया गया। भाई सती दास जी… भाई सती दास, भाई मती दास के छोटे भाई थे। वह संस्कृत, फारसी और गुरबाणी के विद्वान थे। उन्हें भी मुगलों ने इस्लाम कबूल करने के लिए कहा था लेकिन वह नहीं माने। उन्हें रूई में लपेट आग में जलाकर शहीद कर दिया गया। इस दौरान वह वाहेगुरू का सिमरन करते रहे। भाई मती दास जी… भाई मती दास जी श्री गुरु तेग बहादुर जी के दरबार में दीवान थे। गुरुजी को गिरफ्तार करते समय वह भी साथ थे। उन्होंने इस्लाम कबूल नहीं किया तो उन्हें आरे से चीरकर शहीद कर दिया गया। इस दौरान भाई मती दास जी जपुजी साहिब का पाठ करते रहे।

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