भास्कर न्यूज | लुधियाना सिद्धपीठ श्री दंडी स्वामी मंदिर में 75वें श्री हरिनाम संकीर्तन महोत्सव और गौलोकवासी पंडित जगदीश चंद्र कोमल महाराज के 25वें वरदान दिवस के 17वें दिन का कार्यक्रम विशेष रहा। कार्यक्रम की खासियत रविनंदन शास्त्री की उपस्थिति, राधा-राधा नाम की निरंतर गूंज और भजन संध्या का भावपूर्ण वातावरण रहा। यह आयोजन श्री दंडी स्वामी ट्रस्ट, सेवा परिकर और श्री राधा गोविंद संकीर्तन मंडल द्वारा चल रहे 38 दिवसीय महासंकीर्तन का हिस्सा है। आज का संकीर्तन श्रीधाम वृंदावन से आए रविनंदन शास्त्री की मंगलाचरण वाणी से शुरू हुआ। उनके भजनों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई दी। उन्होंने लाड़ली श्यामा किशोरी श्यामा, हे स्वामिनी हमारी स्वामिनी कब तुम कृपा करोगी, हे राधा रानी मेरी महारानी, बरसाना तेरा मेरे मन भा गया, प्यारी तेरी मुस्कान लाड़ली, और तेरी अखियां हैं जादू भरी बिहारी में जैसे सुप्रसिद्ध पद प्रस्तुत किए। उनके सुरों ने पूरे प्रांगण को श्रीधाम बरसाना के दिव्य भाव से भर दिया। श्रद्धालु भक्ति में डूब गए। शास्त्री ने कहा कि संतों की कृपा और हरि नाम ये सब मनुष्य के लिए सबसे बड़ा वरदान है। जिस पर हरिनाम की कृपा हो रही है, वही भगवान की सीधी कृपा का संकेत है। महोत्सव की शुरुआत सुबह केशव जोशी, विशाल अरोड़ा, पंडित दीपक शर्मा और अश्वनी ग्रोवर के संकीर्तन से हुई। बाद में राधा-राधा नाम की अखंड गूंज ने पूरे मंदिर परिसर को भक्ति रस से भर दिया। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने संकीर्तन का आनंद लिया और राधा-नाम स्मरण में लीन रहे। आयोजकों ने बताया कि आज के कार्यक्रम में गोकुल रमणरेती आश्रम के पीठाधीश्वर प्रमुख महामंडलेश्वर गुरु शरणानंद महाराज और श्रीधाम वृंदावन के मन्माध्व गौडेश्वर वैष्णवाचार्य पुंडरीक गोस्वामी महाराज भी शिरकत करेंगे। दोनों संत अपनी वाणी से हरिनाम रस बरसाएंगे और भगवद भक्ति का संदेश देंगे। आयोजकों के अनुसार, उनकी उपस्थिति से भक्तों को अद्भुत आध्यात्मिक लाभ मिलने वाला है। 38 दिन तक चलने वाले इस महासंकीर्तन महोत्सव में प्रतिदिन भजन, कीर्तन, प्रवचन और राधा-नाम जप हो रहा है। भक्तों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। मंदिर परिसर में सेवा परिकर लगातार व्यवस्था संभाल रहे हैं। प्रत्येक दिन अलग-अलग संतों और संकीर्तन मंडलों की भागीदारी हो रही है। श्रद्धालुओं ने कहा कि कार्यक्रम का हर दिन नया अनुभव दे रहा है। राधा-नाम की शक्ति वातावरण को पवित्र बना रही है।


