गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम पंचायत तिलोरा के मोहल्ला बहरीझोरकी में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। यह गांव जंगलों से घिरा है और यहां राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र सहित विशेष पिछड़ी जनजाति के धनुहार और उरांव समुदाय के लोग निवास करते हैं। जिला बनने के बाद भी यहां विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। लगभग दो सौ से अधिक आबादी वाले इस गांव में दो वार्ड हैं, लेकिन आज तक यहां एक भी पक्की सड़क नहीं बन पाई है। ग्राम पंचायत मुख्यालय तिलोरा से बहरीझोरकी की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है, और यह पूरा रास्ता कच्ची पगडंडी है। ग्रामीणों को राशन लेने, बाजार जाने या किसी भी आपात स्थिति में पैदल ही चलना पड़ता है, जिससे उनका जीवन मुश्किलों से भरा है। हाल के दिनों में कुत्ते के काटने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। खराब सड़क के कारण घायल ग्रामीण समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते, जिससे उन्हें उचित इलाज नहीं मिल पाता। वहीं, स्वास्थ्य विभाग का अमला भी इन दूरस्थ ग्रामीणों तक पहुंचने में असमर्थ है। ग्रामीणों ने सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और विधायकों से मुलाकात की है। जिला बनने के बाद उन्हें राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।


