फिटनेस, PUC तो छोड़िए, नंबर प्लेट पुती बसें भी छत पर सवारियां ढो रहीं

भास्कर संवाददाता| पाली शहर सहित जिलेभर में चल रही निजी बसों की फिटनेस, पीयूसी, आरसी तक नहीं चैक नहीं की जा रही है। ​ग्रामीण रूट पर ओवरक्राउड चलने वाली इन्हीं बसों में रोज सैकड़ों लोग सफर करते हैं। जो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। देसूरी-चारभुजा नाल में पिछले दिनों 65 बच्चों को लेकर आ रही पिकनिक बस के ब्रेक फेल होने से 3 बच्चों की मौत और 17 बच्चों के घायल हो गए थे। इस हादसे के बाद भास्कर ने हालात की पड़ताल की। टीम ने 21 बसों का जायजा लिया, जिनमें से 10 बसें ऐसी निकली, जिनकी या तो फिटनेस अवधि खत्म हो चुकी है या पीयूसी नहीं है। कई बसें दूसरे जिलों की पासिंग मिली। जिला मुख्यालय पर रोडवेज बस स्टैंड के पास ऐसी बस दिख गई, जिसकी नंबर प्लेट नहीं थी और छत पर सवारियां बिठाई हुई थीं। नंबर की जगह गौर से देखी तो पता चला कि नंबर प्लेट को सफेद रंग से पोत रखा है। ऐसी बसों की सालभर तक जांच नहीं होती। पाली आरटीओ अर्जुन सिंह राठौड़ ने खुद माना कि जांच अभियान पिछले एक साल से नहीं ला। प्राइवेट बसों की फिटनेस जांच पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान यानी अप्रैल-मई 2024 में की गई थी। यह जांच भी इसलिए की गई थी क्योंकि तब आरटीओ चुनाव ड्यूटी में लगी पोलिंग पार्टियों के लिए वाहनों की जरूरत थी। लिहाजा फिटनेस टेस्ट करना जरूरी था। हालांकि आरटीओ अर्जुन सिंह राठौड़ का दावा है कि जिले में 90 प्रतिशत बसों के डॉक्यूमेंट सही हैं और इन बसों के रोड टैक्स भी जमा है। लेकिन आरटीओ राठौड़ यह नहीं बता पाए कि जिले में कितनी निजी बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। आरजे 27 पीबी 2492 3 मार्च 2025 16 फरवरी 2025 आरजे 09 पीएम 6507 5 फरवरी 2025 6 अप्रैल 2025 आरजे 09 पीए 7707 6 दिसंबर 2024 21 अप्रैल 2025 जांच में दो बसें ऐसी भी मिली, जिनके पास रोड पर चलने की परमिशन भी नहीं है। बिना नंबर प्लेट के दौड़ रही बस का जिक्र करने पर आरटीओ पे दावा किया कि ऐसा हो ही नहीं सकता। फिर भी ऐसी बस की फोटो है तो हमें भेजिए, हम कार्रवाई करेंगे। लेकिन सवाल उठता है कि जिस बस की नंबर प्लेट ही नहीं उस बस की परिवहन विभाग पहचान कैसे करेगा? इसका जवाब आरटीओ अधिकारी भी नहीं दे पाए। आरटीओ के अनुसार 2024 में चुनाव ड्यूटी के वक्त पता चला कि हर विधानसभा क्षेत्र में 5 बसें अनफिट थीं। इस लिहाज से भी जिले की 5 सीटों के हिसाब से 25 बसें अनफिट हैं। उन्होंने माना कि कई अनफिट विभाग की पकड़ में नहीं आ रहीं। जबकि आरटीओ के 7 इंस्पेक्टर, 1 डीटीओ और 1 एआरटीओ अफसर सहित अन्य स्टाफ है।

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