पुलिस ने कहा- ऐसी सुरक्षा समाज के हित में नहीं हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 18 वर्ष के एक युवक और युवती को साथ रहने की अनुमति दी है। हालांकि अदालत ने इतनी कम उम्र में लिव इन रिलेशनशिप में रहने के याचिकाकर्ताओं के विकल्प पर चिंता भी व्यक्त की।
कॉलेज में पढ़ रहे युवक, युवती ने परिवार के विरोध के बाद यह याचिका दायर की थी। याचिका में उल्लेख किया गया है कि भले ही युवक 21 वर्ष से कम उम्र का है और शादी करने में सक्षम नहीं है, फिर भी दोनों बालिग हैं और वे एक-दूसरे के साथ रह रहे हैं। याचिकाकर्ता लड़की की मां की मृत्यु हो गई है। उसने घर का माहौल ठीक नहीं होने की बात कही है। वह घर के खराब माहौल में नहीं रह सकती और युवक के साथ ही रह रही है। हाई कोर्ट ने इस तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों का भी जिक्र किया है। हाई कोर्ट ने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ताओं की पसंद को बाहरी ताकतों से संरक्षित करने की आवश्यकता है। याचिकाकर्ताओं ने नंदकुमार बनाम केरल राज्य 2018 (16) एससीसी 602 पर भरोसा जताया। इसमें यह माना गया था कि जब दोनों बालिग हैं और भले ही वे विवाह करने में सक्षम नहीं हैं, तब भी उन्हें विवाह के बाहर एक साथ रहने का अधिकार है। दोनों को उनके परिजन द्वारा विरोध किए जाने से बचाया जाना चाहिए। इसके विपरीत, पुलिस की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता युवक शादी करने में सक्षम नहीं है और ऐसी सुरक्षा समाज के व्यापक हित में नहीं होगी। दोनों को बाहरी ताकतों से संरक्षित करने की आवश्यकता दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि दोनों याचिकाकर्ता 18 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, इसलिए, उन्हें पसंद की स्वतंत्रता है, जिसे बाहरी ताकतों से संरक्षित करने की आवश्यकता है। अधिवक्ता मनोज बिनीवाले का कहना है कि इस तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किए जा चुके हैं। बालिग होने के बाद उन पर किसी तरह की जोर-जबरदस्ती नहीं की जा सकती। हालांकि शादी करने के लिए युवक का 21 साल और लड़की का 18 वर्ष का होना जरूरी है।


