सरिस्का टाइगर रिजर्व से युवा बाघों का पलायन लगातार बढ़ रहा है। सरिस्का टाइगर रिजर्व में 42 बाघ हैं, इनमें 18 फीमेल हैं। इसमें भी पांच फीमेल की उम्र करीब ढ़ाई से 3 साल के बीच में है। ये सभी फीमेल अपनी-अपनी मां की टेरिटरी में होने के कारण बाहरी जंगल की ओर नहीं आ रही हैं। जबकि मेल टाइगर अपनी नई टेरिटरी की तलाश में जंगल से बाहर निकल रहे हैं। वहीं, हरियाणा के बाद अब सरिस्का का टाइगर (2402) दौसा के बांदीकुई के एक गांव में पहुंच गया। इस टाइगर को सरिस्का की रेस्क्यू टीम 10 दिनों से तलाश कर रही थी। बुधवार को जब टाइगर ने बांदीकुई में एक महिला सहित तीन लोगों को घायल किया तो 2402 की पुष्टि हुई। इसके बाद सरिस्का से एक टीम टाइगर को ट्रंकुलाइज करने के लिए पहुंची तो उसने रेस्क्यू टीम पर भी हमला कर दिया। बाघ के गुस्से में होने के कारण (ट्रंकुलाइज) रेस्क्यू को 3 से 4 दिनों तक के लिए रोक दिया है। ऐसे में सरिस्का और स्थानीय वन विभाग की दो टीम को मॉनिटरिंग के लिए लगाया गया है, जो केवल पगमार्क के आधार पर टाइगर को ट्रेस करेगी। गुरुवार को टाइगर-2402 को स्थानीय लोगों ने सुबह 4 बजे अलवर के करणपुर में एक सरसों के खेते में देखा था। इसके बाद शाम तक किसी ने टाइगर को नहीं देखा है। जिस खेते में टाइगर देखे जाने की पुष्टि हुई थी, वह करीब 20 बीघा का है। हाल ही में तीन नई फीमेल का हुआ नामकरण सरिस्का के जंगलों में पिछले वर्ष तीन नई फीमेल का नामकरण किया गया था। इनमें 2403, 2404,2405 नाम दिया गया। इससे पहले 2302 और 2401 का नामकरण किया था। अगर ढाई से तीन साल के मेल बाघ की बात करें तो जंगल में इनकी संख्या 7 है। इसके अलावा 11 शावक ऐसे हैं, जिनका अभी तक नामकरण नहीं हुआ है। जमवारामगढ़ रेंज में दो बाघ पहले से ही रह रहे हैं। इनकी निगरानी के लिए 50 ट्रैप कैमरे लगाए हैं। इन कैमरों में भी टाइगर (2402) कहीं पर भी ट्रैप नहीं हुआ। अब सवाल यह है कि जब 2402 जमवारामगढ़ की नारायणी माता, अजबगढ़ होते हुए निकला तो इसके बावजूद यह ट्रैप क्यों नहीं हुआ। सरिस्का से हरियाणा पहुंचा था बाघ कुछ दिनों पहले सरिस्का का एक बाघ (2303) हरियाणा चला गया था, जिसे रेस्क्यू कर वापस लाया गया। बाद में उसे बूंदी के जंगलों में छोड़ दिया गया। एक्सपर्ट की माने तो सरिस्का टाइगर रिजर्व के टाइगरों के पलायन का कारण नई टेरिटरी की तलाश है। अब तक चार टाइगर नई टेरिटरी की तलाश में जा चुके हैं। इसमें से दो टाइगर (एसटी-24 और एसटी-2305) जयपुर के महज 15 किमी दूरी के जंगलों में मौजूद हैं।


