आम आदमी पार्टी ने पुलिस पर आदिवासियों के शोषण का आरोप लगाया है। शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि बस्तर में आदिवासियों का शोषण पुलिस कर रही है। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य कांकेर देवलाल नरेटी ने बताया कि 14 अगस्त को केशकाल क्षेत्र के कोहकामेटा गांव के चार युवक (उम्र 23-24 वर्ष) जंगल घूमने गए थे। उनका यह भी कहना है कि पुलिस की गाड़ी से लकड़ी की तस्करी की जा रही है। देवलाल नरेटी ने कहा कि पुलिस ने उन्हें नक्सली बताकर गोली मार दी। युवक लगातार चिल्लाकर अपनी पहचान बता रहे थे, उन्होंने मोबाइल और आधार कार्ड भी दिखाए, लेकिन पुलिस ने नहीं सुनी। बाद में घटना को नक्सली मुठभेड़ बताया गया, जबकि आसपास कहीं भी गोलीबारी के निशान नहीं थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मृतक के पिता को नक्सलियों की ओर से गोली लगने की झूठी जानकारी दी, लेकिन पिता ने इसे मानने से इनकार कर दिया। देवलाल नरेटी ने कहा यह बेहद गंभीर मामला है, दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस की गाड़ी से लकड़ी की तस्करी देवलाल नरेटी ने कोहकामेटा में गांव के लोगों ने पुलिस की गाड़ी की अवैध तस्करी करते हुए एक ट्रक को पकड़ा था। ग्रामीणों ने पुलिस के ट्रक से 11 लट्ठे सागौन की लकड़ी पकड़ी। ग्रामीणों जब वन विभाग के कार्यालय पहुंचे, उस दौरान वहां डीएफओ ने सफाई दी कि हमारे पास वाहन नहीं था, इसलिए पुलिस की गाड़ी इस्तेमाल की गई। नरेटी ने कहा कि अगर पुलिस सुरक्षा में लकड़ी जा रही थी तो आखिर किस अधिकारी या मंत्री के लिए भेजी जा रही थी? पुलिस गाड़ियां आगे-पीछे क्यों लगी थीं? वहीं प्रवक्ता सूरज उपाध्याय ने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के संरक्षण में आदिवासियों का शोषण करती है और झूठा प्रचार करती है कि आदिवासी ही जंगल काट रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से लकड़ी की तस्करी छिपाने और ग्रामीणों में दहशत फैलाने के लिए ही निर्दोष युवक को गोली मारी गई, ताकि गांव वाले घर से बाहर न निकलें और अवैध कारोबार आसानी से चलता रहे।


