भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह एक दिवसीय दौरे पर सीकर आए। अरूण सिंह ने भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यशाला को संबोधित किया और कार्यकर्त्ताओं को S.I.R., जी-राम-जी, संगठन सशक्तिकरण पखवाड़े और अटल स्मृति वर्ष के बारे में विस्तार से बताया। सीकर पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्त्ताओं ने राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह का स्वागत किया। इससे पहले भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह ने खाटूश्याम बाबा के धोक लगाई। कार्यशाला के बाद मीडिया से बातचीत में भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह ने कहा कि कोई कुछ भी कहे जनता जानती है कि मनरेगा का जी-राम-जी में रूपांतरण गांवों की जनता के हित में है। अब मजदूरों को 100 दिन की बजाय 125 दिन काम मिलेगा। कांग्रेस खोखला आंदोलन कर रही है, कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ेगी, कांग्रेस मुद्दा विहीन पार्टी बन चुकी है। राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई नेताओं का नेतृत्व फेल और असफल साबित हो चुका है। केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार जनहितैषी काम कर रही है, इसलिए जनता हमारे साथ जुड़ी है। कांग्रेस नकारात्मक राजनीति करके देश को तोड़ने का काम कर रही है, इसलिए अब कांग्रेस का भविष्य समाप्त है। राजस्थान के मुख्यमंत्री केंद्र के नेताओं से बातचीत करके मंत्रीमंडल विस्तार पर जवाब देंगे। अरुण सिंह बोले कि आज भाजपा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार आगे बढ़ रही है, तो वहीं, कांग्रेस पार्टी भ्रम और नकारात्मकता की राजनीति कर रही है। कांग्रेस का भ्रम फैलाने की कोशिश लगातार फेल रही है। जी-राम-जी बिल पास होने के बाद अब मजदूरों को 100 दिन की बजाय 125 दिन का काम मिलेगा, इस तरह केंद्र सरकार ने 25 प्रतिशत काम के दिन बढ़ा दिए हैं। साथ ही, मजदूरों को काम देने में विलंब होगा तो जिम्मेदार के पैनल्टी लगेगी। जी-राम-जी के मजदूरों का पेमेंट सीधा उनके संबंधित बैंक खाते में जाएगा। अरुण सिंह ने एकदिवसीय कार्यशाला को लेकर कहा कि नरेगा के समय कांग्रेस राज में गड्ढे खोदने और गड्ढे भरने का काम ही किया जाता था। जी-राम-जी के तहत नए तालाब, स्कूल, बांध, डिस्पेंसरी आदि बनेंगे, जिससे गांवों का सर्वांगीण विकास होगा। इस तरह महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज का सपना साकार होगा, लेकिन कांग्रेस इसको लेकर देशभर में निगेटिव भ्रम का माहौल बना रही है। कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ के लिए महात्मा गांधी के नाम का इस्तेमाल किया। मनरेगा बहुत बदनाम हो चुकी, इसमें केवल गड्ढे खोदने का काम हुआ, कई जगहों मनरेगा सिर्फ कागजाें में ही रह गया। कई जगह तो ये हालत थी कि प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हुए, मनरेगा के नाम पर एक सड़क को कई बार बना दिया गया। मनेरगा में 3 महीने तक महिलाएं शहरों में काम करके गांव से नरेगा मजदूरी उठाती थीं। अब जो पैसा खर्च हो रहा है, उसके तहत बजट आवंटन बढ़ाया गया है। कांग्रेस जो निगेटिविटी की राजनीति कर रही है, इसी वजह से लगातार हार रही है।


