सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है। कांकेर और नारायणपुर जिले से 20 युवक और 20 युवतियों का पहला जत्था मंगलवार को लखनऊ के लिए रवाना हुआ। रायपुर रेलवे स्टेशन से रवाना हुए इस दल के साथ बीएसएफ के चार अधिकारी भी मौजूद हैं। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों के युवाओं को देश की संस्कृति से जोड़ने का प्रयास है। लखनऊ में ये युवा अन्य राज्यों से आए प्रतिभागियों के साथ अपनी संस्कृति साझा करेंगे। वे विभिन्न राज्यों की परंपराओं, पहनावे और जीवनशैली से परिचित होंगे। लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम करेंगे प्रस्तुत सात दिवसीय कार्यक्रम में लखनऊ के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण होगा। सभी राज्यों के प्रतिभागी अपने लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम में संवैधानिक अधिकारियों से संवाद, पैनल चर्चा और करियर मार्गदर्शन शामिल हैं। यह आयोजन केंद्र सरकार के मेरा युवा भारत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और गृह मंत्रालय के सहयोग से हो रहा है। बीएसएफ इस साल कांकेर और नारायणपुर से 25 भ्रमण कार्यक्रम करेगी। इनमें 18 से 22 वर्ष के 650 युवा हिस्सा लेंगे। प्रतिभागी शैक्षणिक और सामाजिक विषयों पर चर्चा करेंगे। वे खेलकूद और औद्योगिक गतिविधियों से भी जुड़ेंगे। लखनऊ में उनका उद्योगों और सुरक्षा बल कैंपों का भ्रमण भी होगा। BSF बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि यह पहल युवाओं को नक्सलवाद की छाया से बाहर निकालकर उन्हें राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है। इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि वे भविष्य में अपने समुदाय को भी नई दिशा देने में सक्षम होंगे।


