केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) घूसकांड मामले में पकड़े तीन आरोपियों को शनिवार दोपहर सीबीआई की विशेष कोर्ट में पेश किया। कोर्ट के आदेश पर मुख्य दो आरोपियों को रिमांड पर और एक आरोपी को जेसी भेज दिया। घूसखोरी में पकड़े चारों आरोपियों के जब्त मोबाइल में CBI को पैसों के ड्राफ्ट को लेकर अहम सबूत मिले है। CBI की निगाहे फायदा उठाने वाले कुछ बिल्डर्स पर टिकी हुई है। CBI सूत्रों के मुताबिक, आईटीएटी घूसकांड में चार प्रमुख आरोपी डॉ. एस सीतालक्ष्मी, एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया, मुज्जमिल और अकाउंटेंट-मेंबर कमलेश राठौर को अरेस्ट किया गया था। CBI ने कस्टडी में मौजूद चारों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की। आरोप है कि पूछताछ में आरोपियों ने संदिग्ध लेन-देन, प्रॉपर्टी, डॉक्यूमेंट और मिली-भगत को लेकर एक-दूसरे पर ही आरोप-प्रत्यारोप गए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। CBI ने चारों आरोपियों के मोबाइलों को जब्त किया है। उनके मोबाइल से पैसों के ड्राफ्ट को लेकर CBI को कुछ अहम सबूत हाथ लगे है। CBI की ओर से शनिवार दोपहर चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। CBI की विशेष कोर्ट के आदेश पर डॉ. एस सीतालक्ष्मी और एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया को 2 दिसम्बर तक रिमांड पर सौपा है। आरोपी मुज्जमिल को जेसी भेज दिया गया। खर्च उठाने का शक
CBI की ओर से गिरफ्तार आरोपियों से ITAT में कार्यरत कुछ सीए और टैक्स एडवाइजरों के नामों पर भी चर्चा की गई। CBI को कुछ सीए पर आरोपी डॉ. एस सीतालक्ष्मी के घर खर्च, हैदराबाद आने-जाने की व्यवस्था का खर्च और अकाउंटेंट-मेंबर कमलेश राठौर के फ्लैट का किराया खर्च उठाने का भी शक है। इसके साथ ही ITAT के आदेशों से लाभान्वित हुए कुछ बिल्डर्स भी CBI की निगाहे है। CBI की ओर से घूसकांड को लेकर कई लोगों से भूमिका संदिग्ध मानकर पूछताछ भी की गई है। मामले में अब तक 1.40 करोड़ रुपए के रिश्वत का मामला उजागर हो चुका है।


