NH-75 में मुरगू नदी पर बन रहे पुल के पास बनाए गए डायवर्जन में जान गंवाने वाले CUJ के दोनों स्टूडेंट्स का शव देर रात घटनास्थल से उठाया जा सका। इसके लिए पुलिस प्रशासन को सख्ती भी बरतनी पड़ी। हादसे के बाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स घटनास्थल पर बैठ कर NH-75 को जाम कर दिया था। बुधवार को दिन के 11 बजे शुरू हुआ उनका प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। मिली जानकारी के अनुसार स्टूडेंट्स के बात करने के लिए मांडर सीओ चंचला कुमारी, खलारी डीएसपी रामनारायण चौधरी, अन्य थानों की पुलिस के अलावा सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पदाधिकारियों ने भी उग्र छात्रों को समझाने की कोशिश की। पर छात्र सुनने को तैयार नहीं थे। वे रांची डीसी सहित परिवहन मंत्री और एनएचआई के पदाधिकारियों को बुलाने पर अड़े रहे। उग्र छात्र मृतक छात्रों के लिए अलग-अलग मुआवजा और नौकरी की मांग कर रहे थे। झड़प में स्टूडेंट्स और पुलिस दोनों हुए घायल जानकारी के मुताबिक देर रात 12 बजे तक प्रशासन की ओर से छात्रों को समझाने की कोशिश की गई पर वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस की ओर से हल्का बल प्रयोग किया गया। हालांकि छात्रों को आरोप है कि पुलिस के लाठीचार्ज करने से कई छात्र घायल भी हुए हैं। वहीं पुलिस का एक जवान भी इस झड़प में घायल हो गया। छात्रों और पुलिस की इस झड़प के बाद स्टूडेंट्स शांत हुए फिर शवों को एम्बुलेंस में ले कर रिम्स लाया गया। वहीं देर रात ही दोनों स्टूडेंट्स के पैरेंट्स भी रांची पहुंचे। इसके बाद उन्हें घटना की जानकारी दी गई। बताया गया है कि आज दोनों स्टूडेंट्स के शव का पोस्टमॉर्टम होगा। वहीं छात्रों की ओर से बताया गया कि यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रोटेस्ट जारी रहेगा। जहां हुआ हादसा वहां अब तक 10 लोगों ने गंवाई जान मुरगू पुल मौत का पुल बन गया है। पिछले पांच साल से मुरगू पुल का निर्माण हो रहा है, लेकिन अभी भी अधूरा है। बेतरतीब डायवर्सन और जर्जर सड़क की वजह से पिछले 15 माह में यहां 20 से अधिक दुर्घटनाएं हुई हैं। इसमें 10 लोगों की मौत हो गई है और 18 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। एनएचएआई ने एनएच- 39 का निर्माण कराया है। मुरगू के पास एनएच पर पुल बनाने के लिए तीन साल पहले गड्ढ़ा खोदा गया था। ट्रैफिक मूवमेंट के लिए बगल में अस्थाई डायवर्सन बनाया गया था। लेकिन पिछले दो वर्षों में मानसून में दो बार यह डायवर्सन बह गया। ब्रिज के लिए खोदे गए गड्ढ़े में सरिया और बोल्डर डालकर वैसे ही छोड़ दिया गया। पुल का ठेका लेने वाला ठेकेदार काम छोड़कर भाग गया। दुबारा टेंडर करने में एनएचएआई ने एक साल लगा दिया। गड्ढ़े के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में सड़क भी जर्जर है। इस वजह से यहां अब तक दस लोगों की जान चली गई। युवा से बुजुर्ग तक गंवा रहे जान कैंपस की व्यवस्था से भी छात्रों में नाराजगी छात्रों के गुस्सा फूटने की वजह यूनिवर्सिटी कैंपस की व्यवस्था भी है। दरअसल सेंट्रल यूनिवर्सिटी का कैंपस ब्रांबे से मनातू शिफ्ट कर दिया गया है। जबकि हॉस्टल ब्रांबे में ही है। दोनों कैंपस की दूरी 10 किमी के करीब है। हालांकि दोनों कैंपस के बीच बच चलती है पर वह पर्याप्त नहीं है। ऐसे में स्टूडेंट्स बाइक से आना जाना करते हैं। छात्रों का यह भी कहना है कि जब कैंपस शिफ्ट कर दिया गया है तो हॉस्टल की भी व्यवस्था मैनेजमेंट को करनी चाहिए। दो साल से अधिक समय से स्टूडेंट्स को किसी तरह अपना काम चलाना पड़ रहा है। स्टूडेंट्स मैनेजमेंट के इस रवैये को भी हादसे का जिम्मेदार मान रहे हैं।
———————————– सीयूजे स्टूडेंट्स हादसे की इस खबर को पढ़ें… सड़क हादसे में सेंट्रल यूनिवर्सिटी के 2 छात्रों की मौत:रांची में कॉलेज के कैंपस जाते समय ट्रक ने कुचला; मृतकों में एक PhD स्कॉलर रांची जिले के मांडर थाना क्षेत्र के मालटोटी डायवर्जन में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के दो छात्रों को ट्रक ने अपनी चपेट में ले लिया। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मरने वाले छात्र का नाम देवदास मंडल है। वहीं छात्रा का नाम ऐश्वर्या है। दोनों जियो-इफॉर्मेटिक डिपार्टमेंट के स्टूडेंट हैं। छात्र देवदास मंडल पीएचडी स्कॉलर था। वहीं छात्रा मास्टर्स पहले साल में पढ़ती थी। जानकारी के मुताबिक दोनों मांडर में एक साथ रहते थे और बाइक पर सवार हो कर ब्रांबे कैंपस से मनातू कैंपस जा रहे थे। इसी बीच डायवर्जन के पास मालवाहक ट्रक ने दोनों को अपनी चपेट में ले लिया। जहां शव पड़े हैं, वहां देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाइक सवार काफी दूर तक घसीटते चले गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें….


