DEO ऑफिस अग्निकांड में बड़ी लापरवाही:पांच दिन में सौंपी जानी थी रिपोर्ट, आठ दिन बाद भी नहीं सौंप पाई समिति; SIT जांच की मांग

शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में हुए भीषण अग्निकांड की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। शासन और लोक शिक्षण संचालनालय ने समिति को पांच दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे, लेकिन घटना के सात दिन बाद भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। रिपोर्ट में देरी, साक्ष्य पहले ही खत्म! डीईओ कार्यालय में 17 जनवरी को आग लगने के बाद 18 जनवरी को शासन ने जांच समिति गठित की थी। समिति को 23 जनवरी तक रिपोर्ट देनी थी, लेकिन आज 25 जनवरी तक रिपोर्ट नहीं आई। हैरानी की बात यह है कि जिस पुरानी इमारत में आग लगी थी, उसे 19 जनवरी की सुबह बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। उसी दिन दोपहर करीब तीन बजे जांच समिति मौके पर पहुंची, तब तक पूरी इमारत ढह चुकी थी। सिर्फ औपचारिक निरीक्षण दूसरी ओर NSUI ने आरोप लगाया है कि समिति के सदस्यों ने घटनास्थल पर सिर्फ औपचारिक निरीक्षण किया और बिना किसी विस्तृत जांच के लौट गए। इसके बाद समिति ने डीईओ कार्यालय से ही कागजी जानकारी जुटानी शुरू कर दी। अब स्थिति यह है कि जमींदोज की गई इमारत का मलबा भी हटाया जा रहा है, जिससे भौतिक साक्ष्यों के पूरी तरह नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है। 23 अलमारियां खाक, अहम दस्तावेज नष्ट अग्निकांड में डीईओ कार्यालय की 23 अलमारियां पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। इनमें छात्रवृत्ति, मध्यान्ह भोजन, अनुकंपा नियुक्ति, स्थापना, स्कूल मान्यता और अनुदान से जुड़े कई महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज नष्ट हो गए। सीबीआई जांच की मांग तेज इस पूरे मामले को लेकर शालेय शिक्षक संघ और कांग्रेस पार्टी ने सीबीआई जांच की मांग की है। संगठनों का आरोप है कि— वहीं एनएसयूआई ने डीईओ कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन कर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की। प्रशासन का पक्ष जांच समिति के अध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव ने कहा— “जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में हुए अग्निकांड को लेकर प्रशासनिक जांच जारी है। इस स्तर पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। गहराई से जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही रिपोर्ट तैयार की जाएगी। समिति के साथ फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी।” बढ़ता राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव रिपोर्ट में हो रही देरी, साक्ष्यों का नष्ट होना और राजनीतिक-सामाजिक संगठनों के बढ़ते दबाव के चलते डीईओ कार्यालय अग्निकांड अब एक गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। फिलहाल शासन स्तर पर सभी की नजरें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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