ईडी ने बुधवार को अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 13 बैंक खातों में जमा कुल ₹54.82 करोड़ की रकम फ्रीज कर दी। यह कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के उल्लंघन की जांच के तहत की गई है। इस कार्रवाई को लेकर रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हवाला से जुड़ा यह मामला 15 साल पुराना है, जो 2010 से चल रहा है। ED को शक है कि जयपुर-रींगस हाईवे प्रोजेक्ट से ₹100 करोड़ हवाला रूट से विदेश भेजे गए। ED ने कई लोगों के बयान रिकॉर्ड किए हैं, जिनमें कुछ हवाला डीलर्स भी शामिल हैं। 2010 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को जयपुर-रींगस हाईवे का EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) कॉन्ट्रैक्ट मिला था। हालांकि अनिल अंबानी के स्टेटमेंट में कहा है ये कॉन्ट्रैक्ट पूरी तरह घरेलू था और इसमें कोई फॉरेन एक्सचेंज का हिस्सा नहीं था। दो बार समान भेज चुकी ईडी ईडी ने इसी मामले में अनिल अंबानी को पिछले महीने दो बार पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए। इससे पहले उन्हें 14 नवंबर को हाजिर होने को कहा गया था। अनिल अंबानी ने ED को पत्र लिखकर वर्चुअल या वीडियो रिकॉर्डिंग से स्टेटमेंट देने का प्रस्ताव दिया है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹10,117 करोड़ की संपत्ति जब्त प्रवर्तन निदेशालन (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों की अब तक 10,117 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।ED के अनुसार, ताजा कार्रवाई में मुंबई के बॉलार्ड एस्टेट स्थित रिलायंस सेंटर, फिक्स डिपॉजिट (FD), बैंक बैलेंस और अनलिस्टेड निवेश सहित 18 संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं। इसके साथ ही रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की 7, रिलायंस पावर की 2 और रिलायंस वैल्यू सर्विसेज की 9 संपत्तियां भी फ्रीज की गई हैं। ED ने समूह की अन्य कंपनियों के FD और निवेश भी अटैच किए हैं, जिनमें रिलायंस वेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और फाई मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इससे पहले बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े मामलों में ईडी रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस होम फाइनेंस की 8,997 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्तियां अटैच कर चुका है। जांच में फंड फंड्स के गलत इस्तेमाल का खुलासा ED ने अपनी जांच में पाया है कि रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में बड़े पैमाने पर फंड्स का गलत इस्तेमाल हुआ। 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में 2,965 करोड़ और RCFL में 2,045 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया था। लेकिन दिसंबर 2019 तक ये अमाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए। RHFL का 1,353 करोड़ और RCFL का 1,984 करोड़ अभी तक बकाया है। कुल मिलाकर यस बैंक को 2,700 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। ED के मुताबिक ये फंड्स रिलायंस ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किए गए। लोन अप्रूवल प्रोसेस में भी कई गड़बड़ियां मिलीं। जैसे, कुछ लोन उसी दिन अप्लाई, अप्रूव और डिस्बर्स हो गए। फील्ड चेक और मीटिंग्स स्किप हो गईं। डॉक्यूमेंट्स ब्लैंक या डेटलेस मिले। ED ने इसे ‘इंटेंशनल कंट्रोल फेल्योर’ बताया है। जांच PMLA की धारा 5(1) के तहत चल रही है और 31 अक्टूबर 2025 को अटैचमेंट ऑर्डर जारी हुए 3 सवाल-जवाब में फंड डायवर्जन का पूरा मामला: सवाल 1: अनिल अंबानी के खिलाफ ED ने कार्रवाई क्यों की? जवाब: मामला 2017 से 2019 के बीच यस बैंक द्वारा अनिल अंबानी से जुड़े रिलायंस ग्रुप की कंपनियों को दिए गए करीब 3,000 करोड़ रुपए के लोन से जुड़ा है। ED की शुरुआती जांच में पता चला कि इन लोन्स को कथित तौर पर फर्जी कंपनियों और ग्रुप की अन्य इकाइयों में डायवर्ट किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि यस बैंक के बड़े अधिकारियों को शायद रिश्वत दी गई है। सवाल 2: ED की जांच में और क्या-क्या सामने आया? जवाब: ED का कहना है कि ये एक “सोचा-समझा और सुनियोजित” प्लान था, जिसके तहत बैंकों, शेयरहोल्डर्स, निवेशकों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों को गलत जानकारी देकर पैसे हड़पे गए। जांच में कई गड़बड़ियां पकड़ी गईं, जैसे: सवाल 3: इस मामले में CBI की क्या भूमिका है? जवाब: CBI ने दो मामलों में FIR दर्ज की थी। ये मामले यस बैंक द्वारा रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड को दिए गए दो अलग-अलग लोन से जुड़े हैं। दोनों ही मामलों में CBI ने यस बैंक के पूर्व CEO राणा कपूर का नाम लिया था। इसके बाद एक अधिकारी ने बताया कि नेशनल हाउसिंग बैंक, सेबी, नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसी अन्य एजेंसियों और संस्थानों ने भी ED के साथ जानकारी साझा की। अब ED इस मामले की जांच कर रही है।


