ग्वालियर नगर निगम की उपयंत्री वर्षा मिश्रा पर रिश्वत लेने का आरोप लगा था। इस मामले की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने की। जांच पूरी होने के बाद EOW ने कोर्ट में यह कहते हुए खात्मा रिपोर्ट पेश की कि आरोप साबित नहीं होते, यानी उन्हें क्लीन चिट दी गई। लेकिन इस केस में एक अहम बात सामने आई है। शनिवार को कोर्ट में उसी EOW की इंस्पेक्टर नीतू सिंह ने गवाही दी, जिन्होंने वर्षा मिश्रा को रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया था। इंस्पेक्टर नीतू सिंह ने कोर्ट को बताया कि ट्रैप के समय कार की आगे वाली सीट पर शिकायतकर्ता बैठा था। कार की पीछे वाली सीट पर उपयंत्री वर्षा मिश्रा बैठी थीं। कार की सीट पर 15 हजार रुपए रिश्वत के रखे हुए थे। जब वर्षा मिश्रा के हाथ सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाए गए, तो घोल का रंग गुलाबी हो गया, जो रिश्वत छूने का संकेत होता है। इस घोल को सबूत के तौर पर कांच की बोतल में सुरक्षित रखा गया इंस्पेक्टर ने साफ कहा कि रिश्वत लेने की कार्रवाई सही तरीके से की गई थी और आरोप सही हैं। करीब 3 साल पहले दर्ज हुई थी शिकायत अनूप सिंह यादव ने 9 फरवरी 2023 को नगर निगम की उपयंत्री वर्षा मिश्रा के खिलाफ ईओडब्ल्यू में रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसके पास पांच पार्कों के संधारण का ठेका था। कार्य पूरा होने के बाद नगर निगम से भुगतान होना था। शिकायत के अनुसार, 6 लाख 70 हजार रुपए के बिल पास करने के बदले उपयंत्री वर्षा मिश्रा ने 20 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की थी। इस शिकायत के बाद EOW ने वर्षा मिश्रा को रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया। नगर निगम मुख्यालय के बाहर 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए उपयंत्री को रंगे हाथ पकड़ा गया। रिश्वत कार के अंदर दी गई थी। फरियादी आगे की सीट पर बैठा था, जबकि उपयंत्री पीछे की सीट पर मौजूद थीं। पैसे कार की सीट पर रखे गए थे, जिन्हें उंगलियों से दूसरी जगह खिसकाया गया, जिससे पीछे की ओर रेड हैंड की स्थिति बनी। निरीक्षक नीतू सिंह ने रिश्वत लेते हुए उन्हें पकड़ा था। इस मामले की जांच शैलेंद्र कुशवाह ने की और बाद में खात्मा रिपोर्ट न्यायालय में पेश की। ट्रांसक्रिप्ट में रिश्वत लेने की बातचीत रिकॉर्ड


