FIR दर्ज करने से 1 घंटा पहले इंदी गिरफ्तार:अदालत ने पुलिस को लगाई फटकार, कोर्ट ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

पंजाब के लुधियाना में एक स्थानीय अदालत ने कांग्रेस नेता इंदरजीत सिंह उर्फ इंदी की गिरफ्तारी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए लुधियाना पुलिस को बैकफुट पर ला दिया है। अदालत ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाई हैं, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर होता नजर आ रहा है।
इंदी, पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु के करीबी हैं और वार्ड नंबर 61 से कांग्रेस पार्षद परमिंदर कौर के पति हैं। गिरफ्तारी और FIR दर्ज की टाइमिंग में कोर्ट को मिल फर्क
अदालत ने पुलिस की रिमांड याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इंदी को कथित तौर पर सुबह 9:15 बजे उनके घर से उठाया गया, जबकि एफआईआर बाद में 10:08 बजे दर्ज की गई। अदालत ने इस क्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे गिरफ्तारी की वैधता पर गंभीर संदेह पैदा होता है और ऐसा लगता है कि आरोपी को आपराधिक मामला दर्ज होने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
अदालत ने पुलिस कार्रवाई पर एक और गंभीर सवाल उठाया। इंदी को पहले एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और फिर लगभग दो घंटे बाद दूसरी अदालत में ले जाया गया। इस दौरान पुलिस ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया कि आरोपी को कहां रखा गया और किसके आदेश पर रखा गया।
अदालत ने कहा कि इस अस्पष्टीकृत अंतराल से अभियोजन पक्ष की विश्वसनीयता कमजोर होती है और गिरफ्तारी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठता है। इंदी और परिवार की गिरफ्तारी का लिखित कारण देने में पुलिस विफल अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारणों के बारे में बताना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 22(1) के तहत एक अनिवार्य संवैधानिक सुरक्षा है, जो अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से मिलती है। अदालत ने कहा कि पुलिस इंदी या उनके परिवार के सदस्यों को गिरफ्तारी के लिखित कारण देने में विफल रही है। गिरफ्तारी से पहले नोटिस ना देने पर पुलिस घिरी अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी ने यह नहीं बताया कि गिरफ्तारी से पहले आरोपी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (पहले धारा 41-ए CRPC) की धारा 35 के तहत नोटिस क्यों नहीं दिया गया। यह दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं पेश किया गया कि इंदी के भागने का खतरा था, सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते थे, या प्रभावी जांच के लिए उन्हें हिरासत में रखने की आवश्यकता थी। अदालत ने इन खामियों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि गिरफ्तारी संवैधानिक सुरक्षा उपायों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है, इसलिए यह अवैध है। इसके चलते पुलिस रिमांड की याचिका खारिज कर दी गई और आरोपी को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया गया। 20 दिसंबर को हुआ था मामला दर्ज इंदी के खिलाफ 20 दिसंबर को लुधियाना नगर निगम के कमिश्नर (ए) की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, 132, 218, 221, 222, 224, 351 (3) और 62 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार रोज गार्डन सर्कल के प्रभारी अजय कुमार पर इंदी ने ड्यूटी के दौरान हमला किया था। 21 दिसंबर को, एक स्थानीय अदालत ने कांग्रेस नेता इंदरजीत सिंह इंदी को रिहा करने का आदेश दिया, उनकी गिरफ्तारी को ‘अवैध’ बताया और पुलिस द्वारा गंभीर प्रक्रियात्मक चूक की ओर इशारा किया।

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