GIS के लिए जमीन चाहिए, जतन कैसे-कैसे:ग्रामीणों को मनाने पहाड़ी पर डेढ़ किमी पैदल चले, टेंट-तंबू लगाकर दरी पर बैठे

फरवरी अंत में भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को लेकर मुख्यमंत्री के निर्देश पर उद्योग विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी के साथ अफसरों के पास टारगेट है ज्यादा से ज्यादा जमीन का। कहीं जमीनों की बाधा है तो कुछ वर्तमान प्रोजेक्ट के विस्तार और नए प्रोजेक्ट के लिए जमीन की दरकार है। यही कारण है कि उद्योग विभाग के अफसर इसे लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे। किसानों, जमीन मालिकों को उद्योगों के फायदे बता रहे। किसी भी जतन से जमीन अधिग्रहण के लिए तैयार करना चाहते हैं। ऐसी ही मशक्कत इंदौर-उज्जैन रीजन में एमपीआईडीसी भी कर रहा है। अफसरों के साथ भास्कर ने भी जानी उद्योगों और निवेशकों के लिए जमीन की जुगाड़ और जतन में लगे अफसरों की पहल। इंदौर संभाग में अभी 3776.84 हेक्टेयर की जरूरत है सारी मशक्कत 10 हजार हेक्टेयर में नए प्रोजेक्ट के लिए सूत्रों का कहना है कि आगामी जीआईएस में करीब 10 हजार हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी। इस समिट में अकेले इंदौर-उज्ज्जैन रीजन में 50 हजार करोड़ का निवेश संभावित है। इसमें भी 10 हजार करोड़ सिर्फ पीएम मित्रा पार्क में, बाकी पीथमपुर के अलग-अलग सेक्टर, धार के नए निवेश क्षेत्र, विक्रम उद्योगपुरी के विस्तार, मेडिकल डिवाइस पार्क, आईटी पार्क सहित अन्य सेक्टर में होना है। अभी विभाग के पास इंदौर रीजन में करीब 4 हजार हेक्टेयर जमीन है और इतनी की ही आवश्यकता है। इसी तरह उज्जैन रीजन में 3800 हेक्टेयर है और 6200 हेक्टेयर जमीन और निकाली जा रही है। कुछ प्रोजेक्ट घोषित हो गए है तो कुछ में सरकार से जमीन के आवंटन का अलग-अलग स्तर पर आवंटन होना है। सीन-1 : चलें तो सही, कोई तो मिलेगा काली बिल्लौद के पास पहाड़ी। स्थानीय इंजीनियरों के साथ एमपीआईडीसी कार्यकारी संचालक राजेश राठौर कुछ दूर तक कार से चलते हंै, फिर स्टाफ ने कहा… सर गाड़ी आगे नहीं जाएगी, पैदल चलना पड़ेगा, करीब पहाड़ी में डेढ़ किमी चलने के बाद राठौर ने पूछा… किसान मिलेगा तो सही…, यहां कंपनी बाउंड्रीवॉल बनाने का काम शुरू करती है तो आदिवासी बुजुर्ग तो ठीक, महिलाएं भी आ जाती हैं और कहती हैं चले जाओ… बुजुर्ग का पता चला, अभी नहीं है। एक स्थानीय व्यक्ति को उसे मनाने की जिम्मेदारी दी जाती है। शाम को वह मानता है। यहां 100 एकड़ जमीन एशियन पेंट्स को 2024 में ही अलॉट हुई है, 50 एकड़ और दी जानी है, उसी की मशक्कत। सीन-2 : वे नहीं आएंगे, हमें ही जाना है रतलाम से 8 किमी दूर ग्राम पलसोड़ी…, दोपहर 2 बजे अफसर पहुंचते हैं। बीच में ही फोन आता है सर गांव वाले मेन रोड की स्कूल तक नहीं आना चाहते, गांव में ही बुला रहे हैं। थोड़ी देर में गांव के पास एक टीले पर टेंट लगा। साइरन के साथ अफसर पहुंचते हैं। जूते-मोजे निकालकर राठौर पहले से मौजूद विधायक मथुरालाल डावर के पास दरी पर जाकर बैठ जाते हैं। पंच खड़ा होता है और कहता है आपके लोग यहां घरों की नपती कर रहे हैं। गांव के आगे बहुत जमीन है, वहां चले जाइए, यहां काम नहीं करने देंगे। अफसर समझाते हैं, हमारी टीम न आपके घर को हाथ लगाएगी न पशुओं को। हमें काम करने दीजिए। इससे आपके बच्चों को नौकरी मिलेगी।

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