HIV संक्रमित ब्लड चढ़ाने के मामले को लेकर हाई-लेवल बैठक:MP के सभी ब्लड सेंटर्स का ऑडिट, 5 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश; रक्त रिप्लेसमेंट पर रोक

सतना में बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाने से जुड़े हालिया मामलों को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के सभी शासकीय और निजी ब्लड सेंटर्स की व्यापक जांच की जाएगी। इसे लेकर आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी ने राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की और साफ शब्दों में कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयुक्त ने निर्देश दिए कि निजी ब्लड सेंटर्स में भी नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एनबीटीसी) की गाइडलाइंस, डीजीएचएस के एसओपी और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में रक्त संग्रहण, जांच, भंडारण और वितरण की प्रक्रिया की विस्तार से समीक्षा की गई। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि रक्त की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता सीधे मरीजों, खासकर बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। सभी ब्लड सेंटर्स का ऑडिट, 5 दिन में रिपोर्ट
प्रदेश के सभी शासकीय और निजी ब्लड सेंटर्स का ऑडिट कर 5 दिवस के भीतर रिपोर्ट ड्रग कंट्रोलर को भेजने के निर्देश दिए गए। ब्लड सेंटर के लाइसेंस नवीनीकरण या नए लाइसेंस के लिए आवेदन ओएनडीएलएस पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य रूप से किए जाएंगे। बैठक में नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन और संचालक लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा दिनेश श्रीवास्तव, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना, संचालक राज्य रक्ताधान परिषद डॉ. योगेश भरसट सहित सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन, अस्पताल अधीक्षक और ब्लड सेंटर प्रभारी शामिल हुए। जिलों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर ब्लड सेंटर्स की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। कानून का सख्त पालन अनिवार्य
आयुक्त राठी ने निर्देश दिए कि सभी ब्लड सेंटर्स में एनबीटीसी गाइडलाइंस, डीजीएचएस द्वारा जारी एसओपी और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 व नियमावली 1945 का कड़ाई से पालन किया जाए। मानकों के अनुरूप स्टाफ, उपकरण या रिकॉर्ड नहीं होने पर संबंधित शासकीय ब्लड सेंटर को तत्काल बंद कर निजी ब्लड सेंटर्स से एमओयू के जरिए सेवाएं ली जाएं। रक्त रिप्लेसमेंट पर पूरी तरह रोक
आयुक्त ने दो टूक कहा कि किसी भी स्थिति में ब्लड रिप्लेसमेंट की अनुमति नहीं होगी। रक्त संग्रहण केवल स्वैच्छिक रक्तदान और रक्तदान शिविरों के माध्यम से ही किया जाएगा। इसके लिए एनजीओ, शैक्षणिक संस्थानों, शासकीय कार्यालयों, पुलिस और सैन्य इकाइयों को सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा। सभी रक्तदाताओं से निर्धारित प्रारूप में स्व-सत्यापित शपथ पत्र लेना अनिवार्य होगा। रक्त जांच में आधुनिक तकनीक को प्राथमिकता
निर्देश दिए गए कि रक्त जांच के लिए प्राथमिकता के आधार पर नाट, एलिसा और सीएलआईए तकनीक का उपयोग किया जाए। केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में सीमित रूप से फोर्थ जनरेशन किट्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे संक्रमित रक्त की आशंका को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा। थैलेसीमिया मरीजों और आपात सुविधाओं पर भी जोर
आयुक्त ने निर्देश दिए कि थैलेसीमिया मरीजों के लिए आवश्यक दवाएं, ब्लड कम्पोनेंट्स और रक्ताधान से जुड़ी सभी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही जांच किट्स, आपातकालीन दवाएं और फार्मास्यूटिकल ग्रेड मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता और वैधता भी जांची जाए। आयुक्त स्वास्थ्य ने स्पष्ट किया कि पेशेवर रक्तदाताओं से रक्त संग्रह पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे मामलों की पहचान होने पर संबंधित ब्लड सेंटर के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। सभी वैधानिक रिकॉर्ड शेड्यूल एफ (एल) के अनुसार संधारित करने के निर्देश भी दिए गए।

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