HMPV-वायरस के राजस्थान में पिछले साल 71 केस मिल चुके:12 साल पहले भी बच्चों में इसके वायरस मिले थे; एक्सपर्ट बोले- पैनिक होने की जरूरत नहीं

कोरोना जैसे HMPV वायरस के इस साल देश में अब तक कुल 8 केस मिल चुके हैं, लेकिन हेल्थ सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये वायरस कोई नया नहीं है। और न ही इससे ज्यादा पैनिक होने की जरूरत है। राजस्थान में पिछले साल ही 71 से ज्यादा केस आए थे। ये केस केवल जयपुर एसएमएस मेडिकल कॉलेज में ही डिटेक्ट हुए थे। वहीं, 12 साल पहले भी इस वायरस के केस मिल चुके हैं। जयपुर के रूंगटा हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर के डायरेक्टर डॉ. अरूण शर्मा ने बताया- HMPV वायरस साल 2001 में सबसे पहले नीदरलैंड में डिटेक्ट हुआ था। तब से वायरस हर सर्दियों में अलग-अलग देशों में लोगों को इंफेक्ट करता है। इसलिए इसे लेकर इतना पैनिक होने की जरूरत नहीं है। नया म्यूटेशन हो इसकी जानकारी नहीं, लेकिन सावधानी जरूरी डॉ. अरूण शर्मा ने बताया- अब तक इस वायरस का कोई नया रूप या म्यूटेशन सामने नहीं आया है। इन दिनों चाइना और मलेशिया में जिस तरह से तेजी से केस सामने आने की खबरें मिल रही हैं। हो सकता है इसका कोई म्यूटेशन हुआ हो। नया वैरियंट आया हो। इसलिए हमें सावधानी बरतनी जरूर चाहिए। मौत का खतरा बहुत ही कम डॉ. शर्मा ने बताया- इस वायरस का प्रभाव 5 साल से छोटी उम्र के बच्चे या 70 साल से ज्यादा एजग्रुप के बुजुर्ग में ज्यादा मिल सकता है। साथ ही क्रिटिकल मरीज जैसे ट्रांसप्लांट (किडनी, लीवर, हर्ट) किए मरीज, कैंसर के मरीज और ऐसे मरीज जिनकी इम्युनिटी पॉवर बहुत कम है। उनमें असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। डॉ. शर्मा ने बताया- ये 4-5 फीसदी प्रभावित मरीजों में सीवियरिटी दिखा सकता है। सामान्यत: ये वायरस अपर रेस्पिरेटरी इलनेस (URTI) टाइप का वायरस है। जो गले तक ही सीमित रहता है। जब ये लोवर रेस्पिरेटरी में चला जाता है तो छोटे बच्चों में निमोनिया होने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार ये बिगड़ जाता है, जो सीवियर निमोनिया की कैटेगिरी में आ जाता है। उस स्थिति में 2-4 फीसदी केस में डेथ की संभावना हो सकती है। सीक्वेंसिंग अब तक नहीं, अब केस पुणे भेजेंगे एसएमएस मेडिकल कॉलेज में माइक्रो बायोलॉजी डिपार्टमेंट की सीनियर प्रोफेसर और स्टेट वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब की नोडल ऑफिसर डॉ. भारती मल्होत्रा ने बताया- इस केस के मामलों की जांच हम पिछले 12-15 साल से करते आ रहे है। कभी इसके पॉजिटिव केस की जीनोम सिक्वेंसिंग हमने नहीं की। लेकिन अब केन्द्र सरकार ने निर्देश दिए है कि कोई भी केस अगर पॉजिटिव आता है तो उसके सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए एनआईवी पुणे भिजवाए जाएं। हमारे पास दिसंबर-जनवरी में अब तक एक भी पॉजिटिव केस नहीं आया है। सर्दियों में ज्यादा प्रभावी, पिछले साल 71 केस डिटेक्ट डॉ. भारती मल्होत्रा ने बताया- इस वायरस की अक्टूबर से लेकर मार्च तक हल्की सर्दी में इंटेनसिटी ज्यादा रहती है। साल 2024 में अक्टूबर-नवंबर में इस वायरस के 2-2 केस आए थे। इसी तरह शुरुआती सीजन यानी जनवरी, फरवरी और मार्च में 13, 34 और 20 केस डिटेक्ट हुए थे। कुल 71 केस डिटेक्ट हुए थे। इसी तरह साल 2023 में भी इसके 23 से ज्यादा केस जयपुर में डिटेक्ट हुए थे। 2012-13 में मिले थे ज्यादा केस डॉ. मल्होत्रा ने बताया- साल 2012-13 में एक स्टडी की गई थी, जिसमें जयपुर समेत आसपास के सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती ऐसे छोटे बच्चे (5 साल तक के) जिनमें सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन से जुड़ी समस्या थी। उनके टेस्ट किए, जिनमें इस वायरस के सबसे ज्यादा केस सामने आए। वायरस से संबंधित ये खबरें भी पढ़ें… कोरोना जैसा चीनी वायरस राजस्थान के बच्चे में मिला:12 दिन से अहमदाबाद में चल रहा बच्चे का इलाज, सर्दी और तेज बुखार था चीन में फैले कोरोना जैसे वायरस HMPV की राजस्थान के डूंगरपुर में दो महीने के बच्चे में पुष्टि हुई है। बच्चा 12 दिन से अहमदाबाद के एक अस्पताल में भर्ती है। बच्चा अभी स्वस्थ बताया जा रहा है। (पूरी खबर पढ़ें)

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