राजस्थान के नागौर जिले के श्रम विभाग में व्याप्त लंबे समय से मजदूरों के हक, छात्रवृत्ति, कार्ड जारी करने और रिन्युअल जैसी सरकारी योजनाओं में दलाली का खेल चल रहा है। नागौर के श्रम विभाग में मजदूरों और छात्रों की सरकारी योजनाओं पर लंबे समय से चल रहे कथित भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। सामने आई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में श्रम निरीक्षक कुलदीप यादव एजेंटों से 8% कमीशन मांगते हुए सुनाई दे रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि रकम नहीं मिलने पर वह फाइलें “रगड़-रगड़ कर रिजेक्ट” कर देंगे। रिकॉर्डिंग में छात्रवृत्ति, मजदूर कार्ड और रिन्यूअल के कामों में तय रेट पर दलाली की बात सामने आई है, जिससे हजारों जरूरतमंद परिवार प्रभावित हो रहे हैं। 8% कमीशन की मांग: फाइलें रिजेक्ट करने की खुली धमकी हाल ही में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई है, जिसमें श्रम निरीक्षक (LI) कुलदीप यादव कथित तौर पर एजेंटों से खुलेआम 8% कमीशन मांगते हुए सुनाई दे रहे हैं। रिकॉर्डिंग के अनुसार, यादव ने स्पष्ट धमकी दी है कि अगर उन्हें यह राशि नहीं दी गई, तो वह फाइलों को रिजेक्ट कर देंगे और कोई कुछ नहीं कर पाएगा। भ्रष्टाचार की बढ़ती शिकायतों के चलते विभाग ने पहले स्थानीय श्रम निरीक्षकों के पावर सीज कर दिए थे। लेकिन पांच महीने बाद, जैसे ही आईडी खुली, श्रम निरीक्षक कुलदीप यादव ने कथित तौर पर एजेंटों की मीटिंग बुलाई और साफ कहा कि 8% दो और काम करवाओ, वरना रगड़-रगड़ कर रिजेक्ट करूंगा। उन्होंने यह दावा भी किया कि 2023 में उन्होंने 27,000 फॉर्म रिजेक्ट कर दिए थे और कोई कुछ नहीं कर सका। फिक्स रेट पर दलाली: मजदूर कार्ड, रिन्युअल और छात्रवृत्ति नागौर में दलाली का रेट कथित तौर पर तय है: मजदूर कार्ड के लिए 500 रुपए और रिन्युअल के लिए 300 रुपये। छात्रवृत्ति फॉर्मों में भी 20% “सैंड बैक” (कमी निकालकर रिजेक्ट) करने की बात हो रही है। यादव ने कथित तौर पर यह भी कहा कि वे महीने में सीमित संख्या में ही फाइलें पास करेंगे, ताकि सिस्टम में कोई समस्या न आए। रिकॉर्डिंग में खुली बोली बाजी और ₹1 लाख एडवांस की मांग ऑडियो रिकॉर्डिंग में कुलदीप यादव और एजेंटों के बीच कमीशन को लेकर खुली बोली बाजी दर्ज है। यादव 8% दलाली पर डील करने की बात करते हैं और जब एजेंट 7% पर अड़ता है, तो यादव उसे खुली चुनौती देते हुए कहते हैं, “आपको जो करना है कर लो मैदान खाली पड़ी है मैं थाने चैलेंज देन कहूं आप कुछ नहीं कर पाओगे।” रिकॉर्डिंग में यादव ने कथित तौर पर कहा कि वह तो 6% में ही काम कर देंगे, लेकिन “ऊपर वाले 2% खाएंगे।” यह बात ऊपरी स्तर पर भी सांठगांठ की ओर इशारा करती है। शाम को यादव ने कथित तौर पर एजेंट को घर बुलाकर ₹1 लाख एडवांस की मांग की, यह कहते हुए कि उन्होंने भी जयपुर में पैसे देकर आईडी चालू करवाई थी। मजदूरों के हक पर हमला यह पूरा मामला गरीब मजदूरों और छात्रों के अधिकारों पर सीधा हमला है। 2023 में 27,000 फाइलें रिजेक्ट होने से हजारों जरूरतमंद लोग प्रभावित हुए होंगे। यह रिपोर्ट विभागीय सिस्टम में गहरी खामियों को उजागर करती है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस ऑडियो की निष्पक्ष जांच होगी? ये ख़बर भी पढ़ें …


