भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के मातृ एवं शिशु वार्ड में आग की सूचना से हड़कंप मच गया। हालांकि यह मॉक ड्रिल का हिस्सा था। वार्ड में आग से 4 बच्चों के झुलसने का मैसेज दिया गया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन पुलिस और जनप्रतिनिधि महात्मा गांधी हॉस्पिटल पहुंच गए। गुरुवार शाम कंट्रोल रूम पर भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के एनआईसीयू वार्ड में आग लगने और 4 बच्चों के झुलसने की सूचना मिली। सूचना मिलने के बाद सबसे पहले भीमगंज थाना पुलिस, सिग्मा और चेतक, फायर ब्रिगेड की गाड़ी, पीएमओ अरुण गौड़, सीओ सिटी मनीष बड़गुर्जर, सीआईडी, कंट्रोल रूम का जाप्ता, रक्षा दल, सुभाष नगर थाना प्रभारी, एडिशनल एसपी, सीओ सदर, जिला कलेक्टर नामित मेहता, एसपी धर्मेंद्र सिंह, एडीएम, एसडीएम और माहापौर राकेश पाठक हॉस्पिटल पहुंचे। यहां इन्होंने अधिकारियों और जाप्ते को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर की गई मॉक ड्रिल के बारे में जानकारी देने पर सभी लोगों ने राहत की सांस ली। जिला कलेक्टर नमित मेहता ने बताया कि हॉस्पिटल मॉकड्रील के दौरान सेफ्टी मेजर चेक किए हैं । हॉस्पिटल के फायर सिस्टम की मार्किंग, फायर एग्जिट की मार्किंग प्रॉपर हो जाए लोगों को प्रॉपर पता हो की यहां पर एग्जिट है, उसकी प्रॉपर मार्किंग की जाए। साथ ही एनआईसीयू वार्ड में सीरियस बच्चे होते हैं, उनको जब यहां से किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाए तो इसी तरह की फैसिलिटी में शिफ्ट किया जाए उसको भी देखा गया। इसके साथ ही जो फायर सेफ्टी ऑफिसर है उन्हें यह भी निर्देश दिए कि अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड के अलावा भी जो वार्ड है,जो कॉमन स्पेस है वहां जो फायर सेफ्टी के प्रोविजन है वो फंक्शन में है या नहीं है, उसे भी देखा जाए। उसमें अगर कमी है तो उसे फुलफिल किया जाए। एसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि मॉकड्रील पुलिस और प्रशासन का ज्वाइंट एक्सरसाइ होता है, जिससे हम लोग अपने रिस्पांस टाइम, अपने जो वेरियस सिस्टम है वो कैसा फंक्शन कर रहे हैं । कंट्रोल रूम कैसा फंक्शन कर रहा है , इसको टेस्ट करते हैं। इसी क्रम में आज जो एनआईसीयू वार्ड है एमजी हॉस्पिटल का वहां पर मॉकड्रील रखा गया है। यहां पर हमने डिफरेंट जो रिस्पांड है उनके रिस्पांस टाइम को नोट किया है और जो भी इसके लर्निंग होंगे वो संबंधित विभाग और कर्मचारियों को ब्रीफ करेंगे। पुलिस पॉइंट ऑफ व्यू से हमने जो एग्जिट प्वाइंट हो सकते हैं, क्राउड कंट्रोल के लिए हमें क्या करना होगा और अगर कभी ग्रीन कॉरिडोर बनाना होगा तो कहां के लिए बनाना होगा इस एंगल से एनालिसिस किया है।


