MP कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की दिल्ली में बैठक आज:संगठन को मजबूत बनाने खड़गे-राहुल गांधी करेंगे चर्चा, राष्ट्रीय अधिवेशन में लगेगी फैसलों पर मुहर

मप्र कांग्रेस के सभी जिला अध्यक्षों की आज (गुरुवार) दिल्ली में कांग्रेस के नए मुख्यालय में बैठक होगी। इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, मप्र के प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के साथ मप्र के सह प्रभारी गण भी मौजूद रहेंगे। संगठन को दुरुस्त करने खड़गे-राहुल करेंगे चर्चा
मप्र में 2018 के विधानसभा चुनाव को छोड़कर 2003 से कांग्रेस लगातार चुनाव हारती आ रही है। 2020 में हुए दलबदल के कारण कमलनाथ सरकार के गिरने और जमीनी संगठन के कमजोर होने के बाद अब कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की कवायद कर रही है। आज होने वाली बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जिला अध्यक्षों से संगठन को मजबूत करने को लेकर चर्चा करेंगे। दिल्ली में बैठक, अहमदाबाद में मिलेगी अंतिम मंजूरी
दिल्ली में होने वाली इस बैठक में जिला अध्यक्षों की भूमिका को और प्रभावी बनाने पर चर्चा होगी। इसके बाद 9 अप्रैल को गुजरात के अहमदाबाद में कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में इस प्रस्ताव को पास किया जाएगा, जिसके बाद इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है। जिलाध्यक्षों को मिलेंगे टिकट बांटने के अधिकार
कांग्रेस संगठन इस बात पर जोर दे रहा है कि जिला अध्यक्षों को अधिक अधिकार दिए जाएं, ताकि वे अपने जिले में संगठनात्मक फैसलों में अहम भूमिका निभा सकें। एआईसीसी ने जिला संगठनों को सशक्त बनाने के लिए सुझाव मांगे हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने पार्षद से लेकर सांसद तक के टिकट वितरण में जिला अध्यक्षों की भूमिका को अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है। चुनाव समिति की बैठकों में भी जिला अध्यक्षों की राय को प्राथमिकता दी जाएगी। कांग्रेस को इसलिए पड़ी जिलाध्यक्षों की बैठक की जरूरत कांग्रेस मप्र में पिछले चार चुनावों से हार रही है। 2018 में कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ दो दर्जन से ज्यादा विधायकों के दलबदल के कारण सरकार गिर गई। जिन क्षेत्रों के विधायकों ने पार्टी छोड़ी, उनके साथ बूथ स्तर तक के कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी चले गए। ऐसे में दल-बदल वाले कई विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनावों के दौरान कांग्रेस को कई बूथों पर बिना कार्यकर्ताओं के चुनाव लड़ना पड़ा और हार भी मिली। कांग्रेस ने दल-बदल से सबक लेते हुए अब यह रणनीति बनाई है कि संगठन को नेता और व्यक्ति आधारित की बजाय जिलाध्यक्ष केंद्रित किया जाए। ऐसे में जिले के संगठनात्मक फैसले जिलाध्यक्ष ही लेंगे। एमपी के साथ इन राज्यों के जिलाध्यक्षों की भी बैठक
3 अप्रैल को दिल्ली में मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली के जिला अध्यक्षों की बैठक होगी। कांग्रेस ने 27 मार्च से देशभर से 250-250 जिला अध्यक्षों के बैच में बैठकों का आयोजन किया है।

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