शहर के क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर विश्वविद्यालय का घेराव किया। जिला अध्यक्ष फलेशुराज सिंह सिसौदिया मोडक़ा के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं की सुरक्षा में तैनात पुलिस बल से धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में कार्यकर्ताओं ने कुलपति को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। घेराव के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब प्रदर्शन कर रहे एनएसयूआई कार्यकर्ताओं और मौके पर तैनात पुलिस बल के बीच धक्का-मुक्की हुई। हालांकि स्थिति को जल्द ही संभाल लिया गया और कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई। प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर सवाल
जिला अध्यक्ष फलेशुराज सिंह सिसौदिया ने कहा कि पिछले वर्ष एबीवीपी द्वारा भी इसी तरह का आंदोलन किया गया था, लेकिन अब तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। एनएसयूआई ने ज्ञापन में विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थायी भवन और लाइब्रेरी की मांग
एनएसयूआई ने कुलपति को अवगत कराया कि विश्वविद्यालय का संचालन दो वर्षों से हो रहा है, लेकिन अब तक स्थाई भवन का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। संगठन ने निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ करने की मांग की।इसके साथ ही लाइब्रेरी में विषयवार पुस्तकों की भारी कमी बताते हुए जल्द नई किताबें उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। माँ सरस्वती की प्रतिमा को लेकर चेतावनी
संगठन ने कहा कि यदि अस्थाई भवन में ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की प्रतिमा विश्वविद्यालय प्रशासन स्थापित नहीं कर सकता, तो एनएसयूआई स्वयं चंदा एकत्र कर प्रतिमा स्थापित करेगी। मनमानी फीस और बस किराए पर उठाए सवाल
एनएसयूआई ने निजी कॉलेजों द्वारा वसूली जा रही मनमानी फीस पर रोक लगाने और प्रत्येक विषय के लिए एक समान व निश्चित फीस तय करने की मांग की।साथ ही दूर-दराज के गांवों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए बस किराए में विशेष छूट की योजना बनाने हेतु जिला प्रशासन से समन्वय करने की मांग भी की गई। बायोमैट्रिक व्यवस्था लागू करने की मांग
जिले के सभी शासकीय और अशासकीय महाविद्यालयों में कक्षाओं के नियमित संचालन और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमैट्रिक मशीनें लगाने की मांग की गई, ताकि उपस्थिति रिकॉर्ड पारदर्शी रह सके। 15 दिन का अल्टीमेटम
एनएसयूआई ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के साथ मिलकर विशाल घेराव और उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।


