PM दौरे से पहले बिलासपुर में शिक्षकों का प्रदर्शन:समायोजन की मांग को लेकर शहर में निकाली रैली, बोले- नौकरी के बदले नौकरी चाहिए

छत्तीसगढ़ में बर्खास्त किए गए B.Ed सहायक शिक्षकों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे से पहले बिलासपुर में रैली निकालकर नौकरी में बहाली की मांग की। सहायक शिक्षक, इस समय अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। निकाय चुनाव की आचार संहिता से पहले हुए आंदोलन को मिलाकर करीब 100 दिनों से ज्यादा का समय इनके प्रदर्शन को हो चुका है। इनकी मांगों को लेकर सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी भी बना दी है, लेकिन कमेटी का कोई फैसला नहीं आया है। जिसके विरोध में बिलासपुर में “न्यायधानी में न्याय की गुहार” नाम से बड़ी रैली निकाली। 2000 टीचर्स बिलासपुर पहुंचे गांधी चौक से नेहरू चौक तक निकली इस रैली में प्रदेशभर से 2000 टीचर्स शामिल हुए, जिनमें आदिवासी समुदाय के टीचर्स बड़ी संख्या में मौजूद रहे। रैली का उद्देश्य छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समायोजन की गारंटी की मांग करना था, जिससे हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके। प्रशासन की रोक के बावजूद जारी रहा आंदोलन रैली के दौरान प्रशासन ने कई स्थानों पर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी लगातार आगे बढ़ते रहे। रैली के समापन पर घुटने टेककर शिक्षकों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रधानमंत्री मोदी का दौरा और शिक्षकों की मांग 30 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छत्तीसगढ़ दौरा प्रस्तावित है, जिसमें वे बिलासपुर में मौजूद रहेंगे। ऐसे में शिक्षकों ने उम्मीद जताई है कि “ट्रिपल इंजन” सरकार उनकी मांगों को जल्द पूरा करेगी। शिक्षकों का कहना है, छत्तीसगढ़ में ट्रिपल इंजन सरकार है, जिसके पास संपूर्ण शक्तियां हैं। अगर सरकार चाहे, तो हमारे समायोजन को ट्रिपल इंजन की स्पीड से पूरा किया जा सकता है। अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन कर चुके हैं शिक्षक बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षक अपनी मांगों को लेकर पिछले कई महीनों से विभिन्न अहिंसक तरीकों से प्रदर्शन कर चुके हैं: शिक्षकों की प्रमुख मांगें नवरात्रि में “शक्ति प्रदर्शन” की चेतावनी अगर 30 मार्च तक शिक्षकों की मांगें पूरी नहीं होती, तो महिला शिक्षिकाएं नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न रूपों में शक्ति प्रदर्शन करेंगी। यह सरकार के लिए सख्त संदेश होगा कि अब वे अपने अधिकारों के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं।

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