आरपीएससी के पूर्व सदस्य रामूराम राईका ने एसआई भर्ती-2021 पेपर लीक मामले में हाईकोर्ट की एकलपीठ द्वारा की गई टिप्पणियों के खिलाफ खंडपीठ में अपील दायर की है। अपील में रामूराम राईका ने कहा-ऐसी टिप्पणियों ने मेरे बेदाग करियर और प्रतिष्ठा को अनुचित रूप से धूमिल किया है। जिसके परिणामस्वरूप उन्हें गंभीर मानसिक पीड़ा, पेशेवर कलंक और उनके सम्मान को अपूरणीय क्षति पहुंची है। उन्होंने कहा- इस मामले में मुझे केवल आरोपों के आधार पर आरोपी बनाया गया है। आरोपों की कोई स्वतंत्र पुष्टि, फोरेंसिक साक्ष्य या न्यायिक प्रमाण नहीं हैं। एकलपीठ की टिप्पणियां केवल सुनी-सुनाई बातों और अपुष्ट आरोपों पर आधारित हैं। सदस्य के रूप में पारदर्शिता-निष्पक्षता सुनिश्चित की अपील में रामूराम राईका ने कहा कि मैं 14 जुलाई 2018 में आरपीएससी सदस्य बना और 4 जुलाई 2022 तक इस पद पर रहा। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान मेरा रिकॉर्ड बेदाग और त्रुटिहीन रहा। मेरे खिलाफ कभी कोई शिकायत, जांच या प्रतिकूल सामग्री नहीं पाई गई। मैंने निरंतर आयोग के हित में काम किया, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की और कई चयन प्रक्रियाओं में भाग लिया, जिन पर व्यक्तिगत रूप से कोई अनियमितता नहीं पाई गई। मेरे खिलाफ कभी भी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई या जांच शुरू नहीं की गई। बेटे-बेटी का चयन योग्यता के आधार पर राईका ने अपील में कहा कि बेटे देवेश राईका और बेटी शोभा राईका का चयन लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में प्रदर्शन सहित समग्र योग्यता के आधार पर किया गया था और पक्षपातपूर्ण व्यवहार या हेराफेरी के कोई तथ्य नहीं हैं। आरोप पत्र में निहित आरोप अभी तक अनसुलझे हैं और उन्हें सबूत के रूप में नहीं माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि आदेश में बेटे-बेटी का एक ही भर्ती प्रक्रिया में एक साथ चयन का उल्लेख किया गया है और यह कहा गया है कि इससे ‘संदेह की छाया उत्पन्न होती है’। ये टिप्पणियां परिस्थितिजन्य प्रकृति की हैं और स्वतंत्र न्यायिक साक्ष्य पर आधारित नहीं हैं। भर्ती में गिरोह द्वारा पेपर लीक का आरोप था उन्होंने कहा कि मामले में आरोप मुख्य रूप से लिखित परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने में प्रणालीगत खामियों से संबंधित थे, जिनमें संगठित गिरोहों द्वारा उम्मीदवारों को पैसे के बदले लीक हुए प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने की कथित संलिप्तता भी शामिल थी। एसओजी में दर्ज एफआईआर पर की गई जांच के बाद चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट मुख्य रूप से निजी गिरोहों और भ्रष्ट तत्वों द्वारा की गई बाहरी अनुचित गतिविधियों से संबंधित है। अपीलकर्ता का नाम इसमें केवल आरोपों के आधार पर लिया गया है। बेटे-बेटी को परीक्षा से 6 दिन पहले पेपर उपलब्ध कराया एसओजी के अनुसार रामूराम राईका ने अपने बेटे-बेटी को परीक्षा से 6 दिन पहले ही हस्तलिखित प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया था। रामूराम राईका ने आरपीएससी के अन्य सदस्य बाबूलाल कटारा के जरिए पेपर हासिल किया था। इंटरव्यू के समय रामूराम राईका का सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्त हो गया था। लेकिन उसने आरपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन संजय श्रोत्रिय और अन्य सदस्यों से मिलीभगत करके बेटे-बेटी को इंटरव्यू में भी अच्छे मार्क्स दिलाए थे। बेटी का टॉप-5 में चयन हुआ था एसआई भर्ती-2021 में रामूराम राईका की बेटी शोभा राईका की 5वीं और बेटे देवेश की 40वीं रैंक बनी थी। दोनों को SOG ने राजस्थान पुलिस एकेडमी (RPA) से पेपर लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके अगले ही दिन 1 सिंतबर 2024 को SOG ने इनके पिता रामूराम राईका को भी गिरफ्तार किया था। तीनों फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। अब जानिए क्या था SI भर्ती रद्द का हाईकोर्ट का आदेश राजस्थान हाईकोर्ट ने 28 अगस्त को एसआई भर्ती 2021 रद्द कर दी थी। 859 पदों के लिए एग्जाम हुआ था। पेपर लीक में कई ट्रेनी एसआई पकड़े गए थे। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने फैसला सुनाते हुए 202 पेज के आदेश में कहा था- इस भर्ती का पेपर पूरे प्रदेश में फैला। पेपर लीक में आरपीएससी के 6 सदस्यों की भूमिका थी। ब्लूटूथ गैंग के पास भी भर्ती का पेपर पहुंचा। इन हालात में इस भर्ती को जारी नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने निर्देश दिए कि साल 2025 की भर्ती में इस भर्ती के पद भी जोड़े जाए। वहीं एसआई भर्ती 2021 के सभी अभ्यर्थियों को इसमें फिर शामिल किया जाए। पढ़िए- हाईकोर्ट ने आरपीएससी को लेकर क्या कहा था? 1. RPSC के तत्कालीन अध्यक्ष की भी गड़बड़ी मानी- कोर्ट ने अपने 202 पेज के आदेश में कहा था- इस भर्ती के पेपर लीक होने में आरपीएससी के चेयरमैन सहित 6 सदस्यों की सक्रिय भूमिका भी सामने आई है। इससे साबित है कि घर के भेदियों ने ही लंका को ढहा दिया। भर्ती की गोपनीयता तब ही भंग हो गई थी, जब आरपीएससी के पूर्व सदस्य ने हाथ लिखित पेपर प्रिंटिंग प्रेस में पहुंचने से पहले ही लीक कर दिया था। आरपीएससी के पूर्व चेयरमैन संजय श्रोत्रिय के भी मामले में शामिल होने से इसकी गंभीरता बढ़ती है। 2. आरपीएससी सदस्य मंजू शर्मा, संगीता आर्य और जसवंत राठी पर सवाल- श्रोत्रिय ने न केवल रामूराम राईका को उनके बेटे और बेटी के साक्षात्कारों से संबंधित भविष्य की कार्रवाई के बारे में निर्देश दिए, बल्कि खुद ने भी साक्षात्कार पैनल में सक्रिय तौर पर भाग लिया था। कोर्ट ने RPSC के सदस्यों की गंभीर लिप्तता मानते हुए आदेश में कहा था- रामूराम राईका ने बाबूलाल कटारा, संगीता आर्य, मंजू शर्मा और जसवंत राठी से अपने दोनों बच्चों के इंटरव्यू को लेकर बात की है, जो सिस्टेमेटिक भ्रष्टाचार को दर्शाता है। 3. कटारा को इंटरव्यू पैनल में शामिल करना गंभीर अपराध- राईका अपने बच्चों को पास करने के लिए संजय श्रोत्रिय से मिला और शोभा राईका की फोटो कटारा को दिखाकर ड्रेस भी बताई और शोभा राईका के इंटरव्यू पैनल में बाबूलाल कटारा ही था। बेटे देवेश राईका के इंटरव्यू पैनल में संजय श्रोत्रिय था। ऐसे में इस भर्ती की शुचिता नहीं रही है और इसको इसी स्टेज पर रद्द कर दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने आदेश में लिखा- विवादित भर्ती प्रक्रिया के इंटरव्यू पैनल में बाबू लाल कटारा को शामिल करना, अपने आप में एक गंभीर अपराध है। जबकि उदयपुर में बाबू लाल कटारा के खिलाफ जांच चल रही थी। 4. प्रिंटिंग प्रेस में पहुंचने से पहले ही लीक हुआ पेपर- कोर्ट ने कहा- आरपीएससी सदस्य ने पेपर प्रिंटिंग प्रेस में पहुंचने से पहले ही लीक कर दिया था। रामूराम राईका ने बाबूलाल कटारा को बताया था कि उसकी बेटी इंटरव्यू में कौनसी ड्रेस पहनकर आएगी, जिससे वो उसे पहचान सके। ये खबर भी पढ़िए पेपर लीक मामले में RPSC का पूर्व सदस्य रामू राईका गिरफ्तार:बेटा-बेटी समेत 5 एसआई भी अरेस्ट, आरपीए में ले रहे थे ट्रेनिंग सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 पेपर लीक मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के पूर्व सदस्य रामू राम राईका को रविवार रात गिरफ्तार किया गया। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने राईका से 5 घंटे पूछताछ की थी। रामू राम राईका को 4 जुलाई 2018 को तत्कालीन बीजेपी राज (वसुंधरा राजे सरकार) के दौरान RPSC का मेंबर बनाया गया था। राईका 4 जुलाई 2022 तक मेंबर रहा। (पढ़िए पूरी खबर)


