राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उज्जैन शहर की बस्तियों में व्यापक स्तर पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मोहननगर बस्ती में एक हिंदू सम्मेलन संपन्न हुआ। उज्जैन में 25 जनवरी तक कुल 64 स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना है। मोहननगर बस्ती में हुए सम्मेलन में स्थानीय समाजजनों ने सक्रिय भूमिका निभाई। स्वयंसेवकों और समाज के लोगों ने घर-घर जाकर व्यक्तिगत निमंत्रण दिए। इस दौरान लोगों को समय की योजना, सामाजिक दायित्वों और भविष्य में होने वाले कार्यों की जानकारी भी दी गई, जिसके परिणामस्वरूप सम्मेलन में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन में श्यामधाम पीठाधीश्वर महंत श्याम गिरी जी महाराज, सीमा वशिष्ठ, मुकेश दिसावल, डॉ. रामतीर्थ शर्मा और कार्यक्रम के संयोजक शेखर रसेनिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता महंत श्याम गिरी जी महाराज ने अपने उद्बोधन में समाज को संगठित रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता और संस्कारों के बिना राष्ट्र की प्रगति संभव नहीं है। उन्होंने महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि यदि वे महीने में कम से कम एक दिन भजन और सत्संग के माध्यम से एकत्रित होकर आपसी और सामाजिक विषयों पर चर्चा करें तो समाज में सकारात्मक वातावरण, एकता और संस्कारों को मजबूती मिलेगी। सीमा वशिष्ठ ने ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर अपने विचार रखे, जिसमें उन्होंने सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग और नागरिक कर्तव्यों के प्रति समाज को जागरूक किया। मुकेश दिसावल ने ऐसे हिंदू सम्मेलनों को समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और सामाजिक चेतना जागृत करने वाला बताया। वहीं, शिवेंद्र तिवारी ने इसे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करार दिया।


